
गुमानीवाला (ऋषिकेश): गुमानीवाला स्थित हिमालय विद्यापीठ में आयोजित जनता मिलन कार्यक्रम के दौरान वन विभाग की कार्रवाई का मुद्दा प्रमुखता से छाया रहा। स्थानीय निवासियों की शिकायतों पर कड़ा रुख अपनाते हुए क्षेत्रीय विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों को फोन पर स्पष्ट निर्देश दिए कि नियम-कानून की आड़ में दशकों से रह रहे परिवारों को डराया जाना स्वीकार्य नहीं है। विधायक ने कहा कि जनहित उनके लिए सर्वोपरि है और किसी भी तरह की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे लंबे समय से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं और पूर्व में सरकार की ओर से बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ऐसे में अचानक कार्रवाई और नोटिस से परिवारों में असुरक्षा का माहौल बना है। जनता मिलन कार्यक्रम में इन्हीं चिंताओं को प्रमुखता से रखा गया।
आधिकारिक जानकारी
विधायक प्रेमचंद अग्रवाल ने वन विभाग के अधिकारियों से बातचीत में कहा कि जहां सरकार ने वर्षों पहले बुनियादी सुविधाएं दी हैं, वहां निवास को अवैध बताकर लोगों को डराना गलत है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता बरती जाए और कानून का पालन करते हुए किसी को अनावश्यक रूप से परेशान न किया जाए।
बिजली विभाग को निर्देश
विधायक ने बिजली विभाग के अधिकारियों को भी स्पष्ट किया कि बिना किसी लिखित आदेश के जनता को बिजली कनेक्शन देने से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित के मामलों में मनमानी की गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि लंबे समय बाद उनकी आवाज को गंभीरता से सुना गया है।
लोगों ने उम्मीद जताई कि प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट निर्देश मिलने से उन्हें राहत मिलेगी और अनावश्यक कार्रवाई पर रोक लगेगी।
विधायक का आश्वासन
विधायक ने क्षेत्रवासियों को भरोसा दिलाया कि जनता इस लड़ाई में अकेली नहीं है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं उनके साथ खड़े हैं और एकजुट होकर अधिकारों की रक्षा की जाएगी। जनहित के खिलाफ किसी भी कार्रवाई का कड़ा विरोध किया जाएगा।
कार्यक्रम में मौजूद लोग
इस अवसर पर ग्राम प्रधान किशोरी पैन्यूली, दीपक मेहर, रुकमा व्यास, दीपा राणा, गोविंद सिंह मेहर, मानवेंद्र कंडारी, सतपाल राणा सहित कई स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
आगे क्या होगा
विधायक के निर्देशों के बाद संबंधित विभागों से रिपोर्ट तलब की जा सकती है। प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के जरिए समाधान निकालने की कोशिश होगी, ताकि कानून के दायरे में रहते हुए स्थानीय परिवारों को राहत मिल सके।







