
मुजफ्फरपुर/देहरादून: उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। बिहार की लड़कियों को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान के मामले में मुजफ्फरपुर की एडीजे प्रथम अदालत ने उन्हें नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह नोटिस 13 जनवरी को हुई सुनवाई के बाद जारी किया गया, जबकि मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को तय की गई है। यह मामला इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें महिलाओं की गरिमा, सामाजिक सम्मान और सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्ति की जिम्मेदारी जैसे गंभीर सवाल जुड़े हुए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह पूरा मामला बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के कांटी थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव से जुड़ा है। आरोप है कि 2 और 3 जनवरी 2026 को गिरधारी लाल साहू ने सोशल मीडिया और एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान बिहार की महिलाओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर विरोध तेज हो गया और इसे महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया गया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई और मामला अदालत तक पहुंचा।
आधिकारिक जानकारी
इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने अदालत में परिवाद दायर किया था, जिसमें गिरधारी लाल साहू को मुख्य अभियुक्त बनाया गया है। परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धाराओं 192, 298, 352, 351, 328, 52, 95, 86, 74 और 75 के तहत आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने प्रथम दृष्टया बयान को गंभीर मानते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी इस विषय पर टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि सार्वजनिक मंचों पर बोलने वालों को शब्दों के चयन में सावधानी बरतनी चाहिए।
वहीं कुछ सामाजिक संगठनों ने इस बयान को महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताते हुए न्यायिक कार्रवाई का स्वागत किया है।
विशेषज्ञ की राय
परिवादी अधिवक्ता सुधीर कुमार ओझा ने कहा कि यह बयान “न केवल बिहार की बेटियों का अपमान है, बल्कि इससे पूरे स्त्री समाज की गरिमा को ठेस पहुंची है। इस तरह की टिप्पणियां राज्य और समाज दोनों की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं।”
आंकड़े / तथ्य
बयान 2 और 3 जनवरी 2026 को कथित रूप से प्रसारित हुआ। मामले में 13 जनवरी को सुनवाई के बाद नोटिस जारी किया गया। अगली सुनवाई की तारीख 26 फरवरी निर्धारित की गई है।
आगे क्या होगा
यदि गिरधारी लाल साहू अदालत में समय पर अपना पक्ष नहीं रखते हैं, तो मामले में एकतरफा सुनवाई शुरू हो सकती है। वहीं अदालत यह भी देखेगी कि बयान के बाद मांगी गई माफी को कानूनी प्रक्रिया में किस तरह से माना जाए।







