
देहरादून: उत्तराखंड में सरकारी जमीनों और संपत्तियों पर बढ़ते अवैध कब्जों को रोकने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार ने पूरे प्रदेश में सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों की जिओ मैपिंग और जिओ रेफरेंसिंग कराने का निर्णय लिया है, ताकि हर इंच सरकारी जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सके। इस पहल से न केवल नए अतिक्रमण रोकने में मदद मिलेगी, बल्कि पहले से किए गए अवैध कब्जों पर भी प्रभावी कार्रवाई का रास्ता खुलेगा, जो प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश के कई हिस्सों में सरकारी जमीनों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट न होने का फायदा अतिक्रमणकारियों को मिलता रहा है। सीमांकन और रिकॉर्ड की अस्पष्टता के चलते न सिर्फ कब्जे बढ़े, बल्कि कई मामलों में कानूनी कार्रवाई भी कमजोर साबित हुई। इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने तकनीक आधारित समाधान अपनाने का फैसला किया है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड शासन के अनुसार प्रदेश भर की सभी सरकारी जमीनों और संपत्तियों की जिओ मैपिंग कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 31 मार्च 2026 की डेडलाइन तय की गई है। तय समय सीमा तक सभी विभागों को अपने अधीन आने वाली सरकारी भूमि और परिसंपत्तियों का सत्यापन और जिओ रेफरेंसिंग कार्य पूरा करना होगा।
कैसे रोका जाएगा अतिक्रमण
नई व्यवस्था के तहत हर सरकारी जमीन की लोकेशन, क्षेत्रफल, उपयोग और मौजूदा स्थिति का विवरण डिजिटल रूप से दर्ज किया जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी तरह के भूमि विवाद की गुंजाइश कम होगी और अवैध कब्जे तुरंत चिन्हित किए जा सकेंगे।
विभागों को दिए गए निर्देश
सरकार ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीन आने वाली जमीनों का विवरण यूसैक द्वारा विकसित वेब एप्लीकेशन पर अपलोड करें। इससे प्रदेश भर की सरकारी संपत्तियों का एक समेकित और प्रमाणिक डाटाबेस तैयार होगा।
मुख्य सचिव का सख्त रुख
हाल ही में आनंद वर्धन ने सरकारी जमीनों पर हो रहे अवैध अतिक्रमण को लेकर सख्त निर्देश दिए थे। सचिव समिति की बैठक में उन्होंने तकनीक के प्रभावी उपयोग पर जोर देते हुए कहा था कि जिओ मैपिंग और डिजिटल वेरिफिकेशन के जरिए ही अतिक्रमण पर स्थायी नियंत्रण संभव है।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि इस कदम से वर्षों से चले आ रहे भूमि विवादों पर विराम लगेगा। पारदर्शी रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विकास कार्यों के लिए जमीन की पहचान आसान होगी और सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।
आगे क्या होगा
डिजिटल डाटा तैयार होने के बाद न केवल नए अतिक्रमण को रोका जाएगा, बल्कि जिन लोगों ने पहले से सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है, उनके खिलाफ ठोस साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इससे विकास योजनाओं के लिए भूमि की उपलब्धता भी बेहतर होगी।




