
पौड़ी गढ़वाल के डोभ श्रीकोट गांव में इन दिनों मानव–वन्यजीव संघर्ष ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंकिता भंडारी के परिवार समेत पूरा गांव दहशत के माहौल से गुजर रहा है। बीते दिनों जहां अंकिता के माता-पिता का सामना भालू से हुआ था, वहीं अब घर के आंगन के पास गुलदार की मौजूदगी देखी गई है। लगातार बढ़ती वन्यजीव गतिविधियों के चलते ग्रामीणों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है, खासकर शाम ढलते ही डर और गहरा जाता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
डोभ श्रीकोट और आसपास के गांवों में पिछले कुछ समय से जंगली जानवरों की आवाजाही बढ़ी है। भालू और गुलदार की गतिविधियों के कारण ग्रामीणों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। पहले भी उत्तराखंड के कई इलाकों में ऐसे मामलों में हमले और जानहानि की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
आधिकारिक जानकारी
अंकिता भंडारी के पिता वीरेंद्र भंडारी के अनुसार, हाल ही में देहरादून से लौटते समय उनकी पत्नी की तबीयत खराब होने पर रास्ते में गाड़ी रोकी गई। इसी दौरान सामने से भालू आता दिखाई दिया। वे, उनकी पत्नी और चालक तुरंत वाहन में सवार होकर वहां से निकले, जिससे बड़ा हादसा टल गया। इसके कुछ ही समय बाद घर के आंगन के पास गुलदार दिखाई देने से परिवार की चिंता बढ़ गई।
स्थानीय / मानवीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि गांव के आसपास जंगल से सटे क्षेत्रों में वन्यजीवों की मौजूदगी आम हो गई है। ग्रामीण दिन में भी अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं और रात के समय भय का माहौल और गहरा हो जाता है।
आंकड़े / स्थिति
ग्रामीणों के मुताबिक, डोभ श्रीकोट क्षेत्र में हाल के हफ्तों में कई बार वन्यजीवों की चहलकदमी देखी गई है। शाम ढलने के बाद आवाजाही लगभग ठप हो जाती है, जिससे दैनिक कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
आगे क्या होगा
वीरेंद्र भंडारी ने वन विभाग से क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाने, गुलदार की गतिविधियों पर तत्काल नियंत्रण और भालुओं की बढ़ती मौजूदगी पर प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि विभाग जल्द कार्रवाई करेगा ताकि भयमुक्त वातावरण बहाल हो सके।







