
ऋषिकेश के रेलवे रोड और बनखंडी शांति नगर क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से गंभीर पेयजल संकट बना हुआ है। भूमिगत फाइबर केबल बिछाने के दौरान की गई ड्रिलिंग से जमीन के भीतर बिछी पेयजल पाइप लाइन कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गई, जिसके चलते घरों में पानी की आपूर्ति ठप पड़ गई। कपड़े धोने से लेकर भोजन पकाने तक के लिए लोगों को टैंकरों का इंतजार करना पड़ रहा है। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि लापरवाही के साथ-साथ विभागों के बीच समन्वय की कमी से मरम्मत कार्य भी समय पर शुरू नहीं हो पा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुराने रेलवे स्टेशन परिसर में एक निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा मशीन से भूमिगत फाइबर केबल बिछाने का काम किया जा रहा था। इसी दौरान ड्रिलिंग से पेयजल लाइन को नुकसान पहुंचा, जिससे पूरे इलाके की आपूर्ति बाधित हो गई। तीन दिन बीतने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो सकी है।
आधिकारिक जानकारी
स्थानीय पार्षद सिमरन उप्पल ने बताया कि ड्रिलिंग के कारण कई स्थानों पर पाइप लाइन टूट गई है। लोगों की परेशानी को देखते हुए टैंकरों की व्यवस्था कराई गई है, जिससे कुछ हद तक राहत मिल रही है। वहीं लोक निर्माण विभाग का कहना है कि बिना अनुमति सड़क खोदाई गलत है और मरम्मत से पहले अनुमति आवश्यक है। अधिशासी अभियंता बीएन द्विवेदी के अनुसार, अनुमति के बिना सड़क तोड़े जाने के कारण मरम्मत कार्य पर आपत्ति जताई गई है।
जल संस्थान की ओर से सहायक अभियंता एबीएस रावत ने कहा कि रेलवे परिसर में ड्रिलिंग से पेयजल लाइन क्षतिग्रस्त हुई थी और आपूर्ति बहाल करने के प्रयास किए गए हैं। हालांकि जमीनी स्तर पर आपूर्ति अभी भी टैंकरों के सहारे चल रही है।
विभागों में सामंजस्य का अभाव
इस पूरे प्रकरण में लोनिवि, जल संस्थान और कार्यदायी एजेंसी के बीच तालमेल की कमी सामने आई है। मरम्मत किस विभाग द्वारा और किस अनुमति के तहत होगी, इसी उलझन में काम आगे नहीं बढ़ पा रहा, जिसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासी गौरव का कहना है कि तीन दिन से घरों में पानी नहीं आ रहा और टैंकरों से पानी भरना पड़ रहा है। पर्याप्त पानी न मिलने से दैनिक काम भी नहीं हो पा रहे हैं।
सिद्धार्थ ने बताया कि कई बार शिकायत के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं हुई, छत पर रखी टंकियां खाली हो चुकी हैं और ठंड के मौसम में पानी की किल्लत ज्यादा परेशान कर रही है।
सतिया देवी के अनुसार, सड़क पर मरम्मत के चलते सुबह काम पर जाने वालों को दिक्कत होती है और टैंकर का इंतजार करना पड़ता है। कपड़े धोने तक का पानी नहीं मिल पा रहा।
आगे क्या होगा
प्रशासनिक स्तर पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर क्षतिग्रस्त लाइन की मरम्मत कराने की जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जिम्मेदार एजेंसी पर कार्रवाई हो और भविष्य में बिना अनुमति ड्रिलिंग पर सख्ती बरती जाए, ताकि ऐसी स्थिति दोबारा न बने।




