
मसूरी: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से जुड़ी जनहित याचिका पर 6 जनवरी को अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सड़क पर किसी भी प्रकार की टोल वसूली अवैध है। अदालत के इस आदेश से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिली है। अब लोग जॉर्ज एवरेस्ट के ट्रैक रूट और कॉमन पाथवे पर बिना किसी शुल्क के बेरोकटोक आवाजाही कर सकेंगे और सार्वजनिक सड़क के उपयोग के लिए किसी को भी पैसे देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
मसूरी के जॉर्ज एवरेस्ट क्षेत्र में कॉमन पार्क एस्टेट रोड पर निजी ऑपरेटर द्वारा बैरियर लगाकर स्थानीय लोगों और पर्यटकों से शुल्क वसूले जाने की शिकायतें सामने आ रही थीं। इसे लेकर स्थानीय नागरिकों में नाराजगी थी और मामले को जनहित से जोड़ते हुए न्यायालय की शरण ली गई।
आधिकारिक जानकारी
इस मामले की सुनवाई उत्तराखंड हाईकोर्ट की खंडपीठ में हुई, जिसमें मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय शामिल रहे। अदालत ने अपने अंतरिम आदेश को अंतिम रूप देते हुए कहा कि सार्वजनिक सड़क पर चलने के लिए किसी भी प्रकार का टोल नहीं लगाया जा सकता।
याचिका में क्या कहा गया
यह जनहित याचिका स्थानीय नागरिक विनिता नेगी द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट के संचालन से जुड़े निजी ठेकेदार ने कॉमन पार्क एस्टेट रोड पर टोल बैरियर लगाकर शुल्क वसूली शुरू कर दी थी, जो कि आम जनता के अधिकारों का उल्लंघन है।
कोर्ट की अहम टिप्पणियां
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जॉर्ज एवरेस्ट पार्क में प्रवेश शुल्क एक अलग विषय हो सकता है, लेकिन सार्वजनिक सड़क पर बैरियर लगाकर पैसे लेना कानूनन गलत है। अदालत ने आठवें प्रतिवादी यानी निजी ऑपरेटर को स्थानीय लोगों और आम जनता से टोल वसूलने से रोक दिया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि यह आदेश पार्क में प्रवेश को पूरी तरह निःशुल्क घोषित नहीं करता, बल्कि केवल सड़क पर टोल वसूली पर रोक लगाता है।
अन्य मुद्दे और अदालत का रुख
अदालत ने यह भी नोट किया कि जिस परियोजना का ठेका वर्ष 2022 में दिया गया और 2023 में अनुबंध हुआ, उसके खिलाफ याचिका 2025 में दायर की गई। इसके बावजूद जनहित को देखते हुए कोर्ट ने मामले की सुनवाई की। याचिका में हेलिपैड, एयर सफारी, वन्यजीव अभयारण्य की निकटता, पर्यावरणीय मंजूरी और स्थानीय लोगों की भागीदारी जैसे मुद्दे भी उठाए गए थे। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज करते हुए पहले दिए गए आदेश को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले का निस्तारण कर दिया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और पर्यटकों का कहना है कि इस फैसले से उन्हें बड़ी राहत मिली है। उनका मानना है कि पर्यटन विकास जरूरी है, लेकिन इसके नाम पर आम जनता के मौलिक अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए।
आगे क्या होगा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट ट्रैक रूट और कॉमन पाथवे पर सार्वजनिक सड़क का उपयोग पूरी तरह मुक्त रहेगा। प्रशासन और निजी ऑपरेटरों को सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी तरह की अवैध वसूली न हो।






