
देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे संवेदनशील मामले में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक के कथित दुरुपयोग को लेकर साइबर क्राइम पुलिस ने सख्त कदम उठाया है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के डीपफेक वीडियो जारी करने तथा एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की AI तकनीक से अश्लील सामग्री तैयार किए जाने की शिकायतों पर गुरुवार को दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पुलिस का कहना है कि इस तरह की तकनीक न केवल भ्रामक सूचनाएं फैलाती है, बल्कि समाज में तनाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति भी बिगाड़ सकती है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हाल के दिनों में AI और डीपफेक तकनीक के जरिये फर्जी वीडियो, आवाज और तस्वीरें तैयार कर उन्हें सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की घटनाएं बढ़ी हैं। अंकिता भंडारी हत्याकांड जैसे मामले में इस तरह की सामग्री सामने आने से जनभावनाएं भड़कने और गलत सूचनाएं फैलने का खतरा बढ़ गया है।
आधिकारिक जानकारी
एसटीएफ के एसएसपी नवनीत सिंह ने बताया कि दोनों मामलों में अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज कर विशेषज्ञ टीम को जांच सौंपी गई है। जांच के बाद AI तकनीक के दुरुपयोग में शामिल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के डीपफेक वीडियो का मामला
एक प्राथमिकी सहस्रधारा रोड निवासी रोहित शर्मा की शिकायत पर दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि एक फेसबुक प्रोफाइल के माध्यम से AI और डीपफेक तकनीक का उपयोग कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के चेहरे और आवाज की हूबहू नकल तैयार की गई।
इस फर्जी वीडियो में अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर तथ्यहीन और आपत्तिजनक बयान दिखाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह की सामग्री संवैधानिक पदों की गरिमा को ठेस पहुंचाने के साथ-साथ समाज में आक्रोश फैलाने का प्रयास है।
AI से अश्लील तस्वीरें बनाने का आरोप
दूसरी प्राथमिकी ऋषिकेश के गुमानीवाला निवासी संजय सिंह राणा की शिकायत पर दर्ज हुई है। उन्होंने एक्स (पूर्व में ट्विटर) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध Grok AI के खिलाफ शिकायत दी है। आरोप है कि जहां अन्य AI प्लेटफॉर्म किसी व्यक्ति की तस्वीर को नग्न या अश्लील बनाने के निर्देशों को अस्वीकार करते हैं, वहीं यह AI ऐसे निर्देश स्वीकार कर रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
डिजिटल अधिकारों से जुड़े जानकारों और स्थानीय लोगों का कहना है कि AI तकनीक का इस तरह का उपयोग डिजिटल यौन उत्पीड़न और निजता के गंभीर उल्लंघन की श्रेणी में आता है। लोगों ने मांग की है कि ऐसी तकनीक उपलब्ध कराने वाले प्लेटफॉर्म पर कड़ी निगरानी और कार्रवाई होनी चाहिए।
आंकड़े / तथ्य
शिकायतकर्ता संजय सिंह राणा ने बताया कि उन्होंने सत्यता जांचने के लिए अपनी सामान्य तस्वीर AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड की, जिस पर कथित रूप से अश्लील तस्वीर तैयार हो गई। इसका स्क्रीनशॉट उन्होंने साक्ष्य के रूप में पुलिस को सौंपा है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों की तकनीकी जांच कर रही है।
आगे क्या होगा
साइबर क्राइम पुलिस के अनुसार, दोनों मामलों में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, अकाउंट संचालकों और तकनीक के दुरुपयोग में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।







