
ऋषिकेश: नगर निगम ऋषिकेश के 12 वार्डों में बसे हजारों लोगों की नजर आज होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हुई है। वनभूमि सर्वे से जुड़े इस मामले में प्रभावित परिवारों को अदालत से राहत मिलने की उम्मीद है। आबादी क्षेत्र में कार्रवाई की आशंका के चलते लोग असमंजस में हैं, वहीं मेयर की अध्यक्षता में गठित पार्षदों की समिति भी प्रभावित परिवारों को किसी भी तरह की कार्रवाई से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रही है। यह मामला अब शहर के लिए सामाजिक और प्रशासनिक दृष्टि से बेहद अहम बन गया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वनभूमि सर्वे को लेकर पिछले कुछ समय से ऋषिकेश में स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। 22 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान वन विभाग को लेकर की गई गंभीर टिप्पणियों के बाद शासन हरकत में आया था। इसके अगले ही दिन 23 दिसंबर को शासन ने मुख्य संरक्षक गढ़वाल की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन किया, ताकि पूरे मामले की जांच की जा सके।
आधिकारिक जानकारी
26 दिसंबर को समिति के अध्यक्ष और सदस्यों ने करीब 100 वनकर्मियों की टीम के साथ ऋषिकेश के आबादी क्षेत्र में वनभूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू कराई। प्रशासन की ओर से कहा गया था कि सर्वे तय दिशा-निर्देशों के तहत किया जा रहा है और इसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से इन इलाकों में रह रहे हैं और इसे आबादी क्षेत्र माना जाना चाहिए। प्रभावित परिवारों ने बताया कि सर्वे के दौरान उन्हें बेदखली का डर सताने लगा है, इसी वजह से वे सुप्रीम कोर्ट से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
आंकड़े / डेटा
नगर निगम ऋषिकेश के कुल 12 वार्ड इस सर्वे से प्रभावित बताए जा रहे हैं, जिनमें हजारों परिवार निवास करते हैं। सर्वे के दौरान लगभग 100 वनकर्मियों की टीम को तैनात किया गया था।
आगे क्या होगा
28 दिसंबर को सर्वे की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मामला फिर सुप्रीम कोर्ट के सामने है। सोमवार की सुनवाई में अदालत के रुख पर आगे की दिशा तय होगी। यदि राहत मिलती है तो प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिल सकती है, जबकि निर्णय विपरीत होने की स्थिति में प्रशासन को अगला कदम उठाना होगा।







