
देहरादून: उत्तराखंड में जल्द ही बिजली दरें स्मार्ट मीटर से प्राप्त खपत के आंकड़ों के आधार पर तय की जाएंगी। बिजली की मांग अधिक होने पर दरें बढ़ेंगी, जबकि मांग कम रहने पर उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली मिलेगी। इसके लिए टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू करने की तैयारी की जा रही है, जिससे राज्य में बिजली आपूर्ति को संतुलित और नियंत्रित किया जा सके। यह व्यवस्था स्मार्ट मीटर से मिलने वाले रियल-टाइम डेटा पर आधारित होगी और इससे उपभोक्ताओं को अपनी खपत पर बेहतर नियंत्रण के साथ-साथ राज्य की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक दक्ष बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
राज्य में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है, वहीं गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करना भी एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। परंपरागत टैरिफ संरचना में खपत और मांग के समय का सीधा संबंध नहीं होता, जिससे सिस्टम पर अनावश्यक दबाव पड़ता है। इसी को ध्यान में रखते हुए तकनीक आधारित टैरिफ मॉडल की दिशा में कदम बढ़ाया जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने भविष्य की टैरिफ संरचना को स्मार्ट मीटर आधारित बनाने का रोडमैप तैयार किया है। निगम ने वर्ष 2027-28 से कृषि श्रेणी को छोड़कर सभी उपभोक्ताओं पर टाइम ऑफ डे टैरिफ लागू करने का प्रस्ताव उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के समक्ष रखा है। इस प्रणाली में पीक, नॉन पीक और ऑफ पीक समय के अनुसार बिजली की दरें अलग-अलग होंगी।
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा
यूपीसीएल के अनुसार, स्मार्ट मीटर से मिलने वाला सटीक और रियल-टाइम डेटा उपभोक्ताओं को यह समझने में मदद करेगा कि किस समय बिजली की खपत अधिक महंगी पड़ती है। इससे वे अपनी खपत को समय के अनुसार समायोजित कर सकेंगे और बिल पर नियंत्रण पा सकेंगे। वहीं, राज्य स्तर पर मांग प्रबंधन आसान होगा और आपूर्ति व्यवस्था अधिक संतुलित बनेगी।
अन्य प्रस्ताव और योजनाएं
निगम ने प्रीपेड मीटरिंग योजना को जारी रखने, सभी श्रेणियों के उपभोक्ताओं के लिए ग्रीन पावर टैरिफ उपलब्ध कराने और ऑनलाइन बिजली बिल भुगतान पर दी जा रही छूट को यथावत रखने का प्रस्ताव भी रखा है। यूपीसीएल का कहना है कि ये कदम उपभोक्ता सुविधा, डिजिटल पारदर्शिता और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देंगे।
आंकड़े / तथ्य
यूपीसीएल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता से जुड़ी याचिका नियामक आयोग के समक्ष दाखिल की है। निगम के आकलन के अनुसार ट्रू-अप प्रभाव, लगभग 12.25 प्रतिशत वितरण हानियां, बढ़ती बिजली खरीद लागत और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण को मिलाकर 2036.99 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राजस्व आवश्यकता सामने आ रही है।
आगे क्या होगा
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि बीपीएल उपभोक्ताओं पर न्यूनतम प्रभाव रखा गया है और उनके फिक्स्ड चार्ज में कोई बढ़ोतरी प्रस्तावित नहीं है। अन्य श्रेणियों में संशोधन आवश्यक निवेश और सेवा गुणवत्ता से जुड़े बताए गए हैं। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने इस प्रस्ताव पर उपभोक्ताओं, सामाजिक संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां आमंत्रित की हैं। इच्छुक उपभोक्ता 31 जनवरी 2026 तक अपनी राय दर्ज करा सकते हैं।






