
रामनगर स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 31 दिसंबर और नववर्ष के जश्न को देखते हुए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कॉर्बेट प्रशासन ने सभी होटल, रिसॉर्ट संचालकों और पर्यटकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बड़ी संख्या में पर्यटकों की आमद के बीच वन्यजीवों की सुरक्षा और संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए नियमों के सख्त पालन के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि नए साल के दौरान बढ़ता शोर वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व देश के सबसे महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है। हर साल नए साल के मौके पर यहां बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं, जिससे आसपास के क्षेत्रों में शोर-शराबा बढ़ जाता है। पूर्व में भी ध्वनि प्रदूषण को लेकर वन्यजीवों के व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव की आशंका जताई जाती रही है, जिसके चलते प्रशासन समय-समय पर सख्त दिशा-निर्देश जारी करता रहा है।
आधिकारिक जानकारी
कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के पार्क वार्डन बिंदर पाल सिंह ने बताया कि रिजर्व की सीमा से बाहर 500 मीटर तक का क्षेत्र राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत साइलेंट ज़ोन घोषित है। उन्होंने कहा कि इस दायरे में स्थित सभी होटल और रिसॉर्ट को तय समय और निर्धारित डेसिबल मानकों का सख्ती से पालन करना होगा। नियमों के विपरीत तेज आवाज में डीजे, संगीत या अन्य ध्वनि उपकरणों का उपयोग पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि नए साल के दौरान बढ़ने वाला शोर वन्यजीवों के साथ-साथ आसपास रहने वाले ग्रामीणों के लिए भी परेशानी का कारण बनता है। पर्यटन कारोबारियों ने भी माना कि नियमों का पालन कर ही पर्यटन और प्रकृति के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।
विशेषज्ञ जानकारी
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, कॉर्बेट क्षेत्र न केवल बाघ संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके आसपास का इलाका एनिमल कॉरिडोर के रूप में भी अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है।
आंकड़े / तथ्य
राज्य सरकार की अधिसूचना के तहत साइलेंट ज़ोन में प्रातः 6 बजे से रात्रि 10 बजे तक अधिकतम 50 डेसिबल और रात्रि 10 बजे से प्रातः 6 बजे तक केवल 40 डेसिबल तक ध्वनि की अनुमति है। ये नियम पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 (संशोधित 2010) के अंतर्गत लागू किए गए हैं।
आगे क्या होगा
कॉर्बेट प्रशासन के अनुसार, नववर्ष के दौरान निगरानी और गश्त बढ़ाई जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने होटल, रिसॉर्ट संचालकों और पर्यटकों से अपील की है कि वे सहयोग करें, ताकि वन्यजीवों और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।







