
ऋषिकेश स्थित एम्स में चिकित्सकों ने समय रहते जटिल चिकित्सा प्रक्रिया कर एक 16 वर्षीय किशोर की जान बचा ली। खेल-खेल में टॉफी की जगह पिन निगलने से बच्चे की श्वास नली अवरुद्ध हो गई थी, जिससे उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। हालत नाजुक होने पर बच्चे को एम्स ऋषिकेश की पीडियाट्रिक इमरजेंसी लाया गया, जहां डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम ने ब्रोंकोस्कॉपी के माध्यम से पिन निकालकर उसकी जान बचाई। यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि थोड़ी सी देरी भी जानलेवा साबित हो सकती थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बिजनौर निवासी 16 वर्षीय किशोर खेलते समय एक हाथ में टॉफी और दूसरे हाथ में पिन लिए हुए था। इसी दौरान गलती से उसने पिन निगल ली। इसके तुरंत बाद उसके गले में तेज दर्द, खांसी और सांस लेने में कठिनाई शुरू हो गई। स्थानीय स्तर पर इलाज संभव न होने पर परिजन 25 दिसंबर को उसे एम्स ऋषिकेश लेकर पहुंचे।
जांच में क्या सामने आया
एम्स में की गई जांच में पाया गया कि नोटिस बोर्ड में इस्तेमाल होने वाली एक पिन बच्चे की दाहिनी ब्रॉन्कस में फंसी हुई है, जिससे श्वास नली आंशिक रूप से बंद हो गई थी। चिकित्सकों ने स्थिति को अत्यंत गंभीर मानते हुए तत्काल ब्रोंकोस्कॉपी करने का निर्णय लिया।
आधिकारिक जानकारी
इस पूरी प्रक्रिया का मार्गदर्शन एम्स ऋषिकेश की पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग की प्रमुख एवं संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने किया।
टीम का नेतृत्व एडल्ट इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. मयंक मिश्रा ने किया। उनके साथ पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. बी. सत्या श्री, पीडियाट्रिक पल्मोनरी विभाग के डॉ. लोकेश अरोड़ा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजय कुमार शामिल रहे।
कैसे निकाली गई पिन
डॉ. मयंक मिश्रा ने बताया कि यह अत्यंत जोखिम भरा मामला था। पहले रिजिड ब्रोंकोस्कॉपी के जरिए पिन को स्कोप के अंदर तक लाया गया। इसके बाद फ्लेक्सिबल ब्रोंकोस्कोप और फोरसेप्स की मदद से पिन को बड़ी सावधानी से बाहर निकाला गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे की सांस और अन्य जीवन रक्षक संकेतों पर लगातार नजर रखी गई।
स्थानीय / मानवीय पहलू
परिजनों का कहना है कि एम्स ऋषिकेश न लाया गया होता तो बच्चे की जान बचना मुश्किल था।
चिकित्सकों की त्वरित प्रतिक्रिया और टीमवर्क से परिवार को बड़ी राहत मिली है।
आगे क्या स्थिति है
सफल प्रक्रिया के बाद बच्चे की हालत स्थिर बताई जा रही है और उसे चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार समय पर इलाज मिलने से किसी स्थायी नुकसान की आशंका नहीं है।







