
ऋषिकेश: सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ऋषिकेश के आसपास खाली पड़ी वन भूमि के चिन्हीकरण और सर्वे की कार्रवाई से लोगों में भारी आशंका और खौफ का माहौल बन गया है। इसी विरोध में सैकड़ों लोग सड़क छोड़कर मनसा देवी रेलवे फाटक के पास रेलवे ट्रैक पर बैठ गए, जिससे रेल यातायात बाधित हो गया। स्थिति को संभालने के लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात है, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे जनजीवन के साथ-साथ रेल संचालन भी प्रभावित हुआ है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने वन विभाग और जिला प्रशासन को खाली पड़ी वन भूमि का सर्वे कर उसे अपने कब्जे में लेने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में ऋषिकेश क्षेत्र में वन विभाग की टीमें चिन्हीकरण कर रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस कार्रवाई से वर्षों से बसे इलाकों पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे असुरक्षा की भावना बढ़ी है।
मनसा देवी रेलवे फाटक पर प्रदर्शन
वन भूमि हाथ से जाते देखने की आशंका के बीच आक्रोशित लोगों ने मनसा देवी रेलवे फाटक के पास रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। बड़ी संख्या में महिलाएं भी प्रदर्शन में शामिल रहीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जान जाए पर जमीन हाथ से न जाए। ट्रैक पर बैठने से रेल संचालन ठप हो गया और हालात तनावपूर्ण बने रहे।
पुलिस-प्रशासन की स्थिति
मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर लोगों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन प्रदर्शनकारी मानने को तैयार नहीं दिखे। क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है।
ट्रेनें प्रभावित
रेलवे ट्रैक जाम होने से कोच्चिवली से आने वाली और योग नगरी स्टेशन से जाने वाली गंगानगर एक्सप्रेस करीब डेढ़ घंटे तक ट्रैक पर खड़ी रही। इसके चलते यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा और अन्य ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा।
शिवाजी नगर में बैठक
इधर शिवाजी नगर में बुलाई गई बैठक में पार्षद सुरेंद्र सिंह नेगी और अभिनव सिंह मलिक के नेतृत्व में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। बैठक में वन विभाग की कार्रवाई को लेकर लोगों ने अपने विचार रखे और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
जनप्रतिनिधियों का बयान
पार्षद अभिनव सिंह मलिक ने कहा कि यह कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर हो रही है और फिलहाल खाली भूमि को चिन्हित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि 5 जनवरी को मामले की अगली सुनवाई होनी है और तब तक पैनिक होने की जरूरत नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर एक समिति गठित कर सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने का निर्णय भी लिया गया है।
आगे की मांगें और कदम
बैठक में यह भी तय किया गया कि जल्द ही एक विशाल जनसभा आयोजित कर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और वन मंत्री सुबोध उनियाल को जन संवाद के लिए आमंत्रित किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष से तत्काल विशेष सत्र बुलाकर वन भूमि पर काबिज क्षेत्रों को विशेष कानून के तहत अधिकार देने की मांग की है।
आगे क्या होगा
प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की कोशिश जारी है। अगली सुनवाई और संभावित समिति गठन के फैसले के बाद आगे की दिशा तय होगी।






