
देहरादून: प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने और नकदी फसलों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ड्रैगन फ्रूट की खेती पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। खास बात यह है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती असिंचित भूमि में भी की जा सकती है और जंगली जानवरों से इसे नुकसान नहीं होता। सरकार ने इसके लिए ड्रैगन फ्रूट नीति 2025 लागू की है, जिसके तहत बागान लगाने पर किसानों को भारी अनुदान का लाभ मिलेगा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में परंपरागत खेती के साथ-साथ अब किसानों को नकदी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल संकट और जंगली जानवरों की समस्या के कारण कई क्षेत्रों में खेती चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। ऐसे में ड्रैगन फ्रूट जैसी फसल, जो कम पानी में उगाई जा सकती है और वन्यजीवों से सुरक्षित रहती है, किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प मानी जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
राज्य सरकार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के लिए ड्रैगन फ्रूट नीति 2025 लागू की है। इसके तहत किसान प्रति एकड़ लगभग आठ लाख रुपये की लागत वाले ड्रैगन फ्रूट बागान पर 80 प्रतिशत तक अनुदान प्राप्त कर सकेंगे। यानी किसानों को छह लाख 40 हजार रुपये तक की सब्सिडी मिलेगी, जबकि शेष एक लाख 60 हजार रुपये स्वयं वहन करने होंगे। यह योजना वर्ष 2025 से 2028 तक लागू रहेगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किसानों का कहना है कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिलने की उम्मीद है।
कृषि से जुड़े लोगों का मानना है कि जंगली जानवरों से सुरक्षित फसल होने के कारण पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों दोनों में यह खेती उपयोगी साबित हो सकती है।
संख्या / आंकड़े
योजना के तहत 228 एकड़ क्षेत्र में ड्रैगन फ्रूट की खेती का विस्तार किया जाएगा।
करीब 450 किसानों को योजना का प्रत्यक्ष लाभ मिलने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना के लिए न्यूनतम पांच नाली भूमि होना आवश्यक है।
यह योजना ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल, बागेश्वर, पौड़ी, देहरादून और टिहरी जिलों में लागू होगी।
आगे क्या होगा
कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने कहा कि सितारगंज की नर्सरी में ड्रैगन फ्रूट की पौध तैयार की जाएगी, ताकि किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध कराए जा सकें। सरकार इस योजना की नियमित निगरानी करेगी और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा।





