
देहरादून: वक्फ संशोधन बिल के बाद देशभर में वक्फ संपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन तय समय-सीमा के भीतर उत्तराखंड में बड़ी संख्या में वक्फ संपत्तियां रजिस्ट्रेशन से वंचित रह गईं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू किए गए उम्मीद पोर्टल पर 6 जून से 6 दिसंबर तक पंजीकरण की समय-सीमा तय की गई थी। इसके बावजूद राज्य में केवल करीब एक चौथाई वक्फ संपत्तियां ही ऑनलाइन दर्ज हो सकीं। अब इस स्थिति को देखते हुए वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण को लेकर एक बार फिर मौका दिए जाने की तैयारी की जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
वक्फ संशोधन बिल के बाद सरकार ने वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के उद्देश्य से उम्मीद पोर्टल शुरू किया था। इसका मकसद वक्फ संपत्तियों के संरक्षण और पारदर्शिता को बढ़ाना था। हालांकि, समय बीतने के बावजूद अपेक्षित संख्या में संपत्तियां पोर्टल पर दर्ज नहीं हो पाईं, जिसके चलते वक्फ बोर्ड और संबंधित लोगों की ओर से समय-सीमा बढ़ाने की मांग उठती रही।
आधिकारिक जानकारी
केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय द्वारा निर्धारित अवधि में उत्तराखंड की केवल लगभग 25 प्रतिशत वक्फ संपत्तियों का ही ऑनलाइन पंजीकरण हो सका। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को अधिकार देते हुए ट्रिब्यूनल को इस संबंध में निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। इसके तहत उत्तराखंड में गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लिए अलग-अलग वक्फ ट्रिब्यूनल गठित किए गए हैं।
ट्रिब्यूनल द्वारा दी गई समय-सीमा
उत्तराखंड में गढ़वाल मंडल के लिए ट्रिब्यूनल ने 6 फरवरी तक और कुमाऊं मंडल के लिए 15 अप्रैल तक वक्फ संपत्तियों के ऑनलाइन पंजीकरण की अनुमति दी है। इस अवधि में जिन संपत्तियों का पंजीकरण पहले नहीं हो पाया था, उन्हें फिर से मौका मिलेगा।
वक्फ बोर्ड का पक्ष
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि उम्मीद पोर्टल वक्फ संपत्तियों के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल थी। उन्होंने कहा कि वक्फ संशोधन बिल को लेकर हुए विरोध और पंजीकरण प्रक्रिया के खिलाफ दुष्प्रचार के कारण शुरुआत में लोग जागरूक नहीं हो पाए। जब लोग जागरूक हुए, तब तक तय समय-सीमा का अधिकांश हिस्सा निकल चुका था। उन्होंने कहा कि छह महीने का काम अंतिम एक से सवा महीने में करने की कोशिश हुई, इसी कारण बड़ी संख्या में संपत्तियां ऑनलाइन दर्ज नहीं हो सकीं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वक्फ से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पोर्टल फिर से नहीं खोला जाता, तो कई संपत्तियां रिकॉर्ड से बाहर रह जातीं। उनका मानना है कि ट्रिब्यूनल द्वारा दिया गया अतिरिक्त समय वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए जरूरी है।
आगे क्या होगा
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड जल्द ही केंद्रीय वक्फ काउंसिल से संपर्क कर उम्मीद पोर्टल को दोबारा खोलने की मांग करेगा। ट्रिब्यूनल द्वारा तय की गई समय-सीमा के भीतर अधिक से अधिक वक्फ संपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज कराने पर जोर दिया जाएगा, ताकि भविष्य में किसी तरह का विवाद या असमंजस न रहे।





