
उत्तरकाशी: जिला प्रशासन और उत्तरकाशी वन प्रभाग की पहल रंग लाती दिख रही है और यदि सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो नए साल में उत्तरकाशी जनपद को चिड़ियाघर (जू) की सौगात मिल सकती है। जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के दिशा-निर्देश पर वन प्रभाग ने प्रस्ताव तैयार करने की शुरुआती कार्यवाही शुरू कर दी है। इसके तहत उप प्रभागीय वन अधिकारियों के माध्यम से संभावित भूमि का चिन्हांकन किया जा रहा है। जैव विविधता से समृद्ध उत्तरकाशी में जू का निर्माण पर्यटन, वन्यजीव संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
हिमालय की गोद में बसा उत्तरकाशी जनपद जैव विविधता की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है। जिले में गंगा घाटी में गंगोत्री नेशनल पार्क और यमुना घाटी में गोविंद वन्यजीव विहार एवं राष्ट्रीय उद्यान स्थित हैं। इसके बावजूद जनपद में अभी तक कोई चिड़ियाघर नहीं है, जिससे वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन की संभावनाएं पूरी तरह साकार नहीं हो पा रही थीं।
आधिकारिक जानकारी
उत्तरकाशी वन प्रभाग के डीएफओ डी.पी. बलूनी ने बताया कि जिलाधिकारी प्रशांत आर्य के निर्देशों के क्रम में चिड़ियाघर निर्माण की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। इसके लिए उप प्रभागीय वन अधिकारियों के माध्यम से विभिन्न स्थानों का निरीक्षण कराया जा रहा है। साल्ड और बसूंगा की ओर भी क्षेत्र देखा गया है, हालांकि अभी एसडीओ स्तर से अंतिम रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है।
स्थानीय / मानवीय दृष्टिकोण
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि उत्तरकाशी में चिड़ियाघर बनता है, तो यह तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय निवासियों के लिए एक नया आकर्षण बनेगा। साथ ही इससे जिले में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
वन्यजीव संरक्षण में भूमिका
प्रस्तावित चिड़ियाघर दुर्घटनाओं या रेस्क्यू के दौरान लाए गए घायल वन्यजीवों के लिए भी आश्रय स्थल का काम करेगा। यहां पशु चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार और देखभाल संभव हो सकेगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण को मजबूती मिलेगी।
प्रस्ताव की प्रक्रिया
वन विभाग द्वारा तैयार किया जाने वाला प्रस्ताव शासन के माध्यम से केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेजा जाएगा। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद ही जू निर्माण की आगे की प्रक्रिया शुरू हो सकेगी।
आगे क्या होगा
जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने स्पष्ट किया है कि जू निर्माण के लिए वन विभाग को निर्देशित किया गया है और प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो उत्तरकाशी में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और वन्यजीव संरक्षण के प्रयास भी मजबूत होंगे।





