
श्रीनगर: वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज, श्रीनगर को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में बड़ी उपलब्धि मिली है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड ने संस्थान को विभिन्न पीजी पाठ्यक्रमों में 10 नई सीटों की स्वीकृति प्रदान की है। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों की कुल संख्या बढ़कर 62 हो गई है। यह स्वीकृति न केवल संस्थान की शैक्षणिक क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि उत्तराखंड को अधिक विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध कराने की दिशा में भी अहम मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में चिकित्सा शिक्षा को सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकार और चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। ऐसे में श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में पीजी सीटों का विस्तार क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आधिकारिक जानकारी
चिकित्सा मूल्यांकन एवं रेटिंग बोर्ड ने विशेषज्ञों के समूह और समीक्षा समिति के साथ संस्थान का भौतिक निरीक्षण किया। मानक मूल्यांकन प्रपत्र के माध्यम से आकलन के बाद संस्थान द्वारा प्रस्तुत स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट की विस्तृत समीक्षा की गई। यह पूरी प्रक्रिया चिकित्सा संस्थानों की स्थापना, मूल्यांकन एवं रेटिंग विनियम तथा स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा नियमावली के प्रावधानों के अनुरूप संपन्न हुई।
समीक्षा के उपरांत शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए संस्थान को एमडी बाल रोग में चार सीटें, एमडी एनेस्थीसियोलॉजी में चार सीटें और एमएस प्रसूति एवं स्त्री रोग में दो सीटें प्रदान की गई हैं। इन पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए अनुमति पत्र जारी करने का निर्णय लिया गया है।
आगे की प्रक्रिया और शेष विभाग
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग ने यह भी निर्देश दिए हैं कि एमडी जनरल मेडिसिन, त्वचा एवं यौन रोग, जैव रसायन विज्ञान तथा एमएस जनरल सर्जरी और अस्थि रोग विभागों में आवश्यक मानकों की पूर्ति करते हुए संस्थान 15 दिनों के भीतर पुनः अपील प्रस्तुत कर सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों और छात्रों का कहना है कि पीजी सीटों में वृद्धि से क्षेत्र के छात्रों को राज्य से बाहर जाने की मजबूरी कम होगी।
चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों ने बताया कि इससे भविष्य में पर्वतीय इलाकों में विशेषज्ञ सेवाएं और बेहतर होंगी।
विशेषज्ञ / प्रशासनिक बयान
संस्थान के प्राचार्य डॉ. आशुतोष सयाना ने इसे संस्थान के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि पीजी सीटों की स्वीकृति से न केवल शैक्षणिक गतिविधियां बढ़ेंगी, बल्कि राज्य को अधिक प्रशिक्षित विशेषज्ञ चिकित्सक भी मिल सकेंगे। शेष विभागों में निर्धारित आवश्यकताओं को शीघ्र पूरा कर पुनः आवेदन किया जाएगा।
प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के प्रयासों से मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी और आधारभूत सुविधाओं को लगातार मजबूत किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
आगे क्या?
संस्थान शेष विभागों में आवश्यक मानकों को पूरा कर पुनः आवेदन करेगा। आने वाले समय में पीजी सीटों की संख्या और बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं दोनों को लाभ मिलेगा।







