
नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने वन विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग, राजकीय राजमार्ग, वन भूमि और राजस्व भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण के मामलों को लेकर स्वतः संज्ञान में ली गई जनहित याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि कई स्थानों पर बिना पूर्व सूचना और नोटिस के ही प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, जो सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन है। इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किस प्रकार किया जा रहा है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह प्रशासनिक कार्रवाई और नागरिक अधिकारों के संतुलन से जुड़ा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
इस मामले की शुरुआत दिल्ली निवासी एक व्यक्ति द्वारा भेजे गए पत्र से हुई थी, जिसमें नैनीताल जिले के पदमपुरी क्षेत्र में वन भूमि और सड़क किनारे अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था। पत्र में कहा गया कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से अतिक्रमण किया गया है, जिससे आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हाईकोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की थी।
न्यायालय का पक्ष
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने पहले ही राज्य सरकार को निर्देश दिए थे कि जिला स्तरीय समितियां बनाकर अतिक्रमण को चिन्हित किया जाए और नियमानुसार सुनवाई के बाद ही कार्रवाई की जाए। हालांकि, याचिकाकर्ता ने अदालत को अवगत कराया कि कई जिलों में इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया और सीधे अतिक्रमण ध्वस्त कर दिया गया। इसे गंभीर मानते हुए अदालत ने मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अतिक्रमण हटाना आवश्यक है, लेकिन यह प्रक्रिया कानून और न्यायालय के निर्देशों के अनुसार होनी चाहिए। बिना नोटिस की कार्रवाई से आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है और प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता है।
आंकड़े / विवरण
हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के दायरे को बढ़ाते हुए पूरे प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग, राजकीय राजमार्ग, वन भूमि और राजस्व भूमि से अतिक्रमण हटाने के निर्देश सभी जिलाधिकारियों और डीएफओ को दिए थे। सभी से इस संबंध में रिपोर्ट तलब की गई है।
आगे क्या होगा
मामले में हाईकोर्ट ने एक सप्ताह बाद अगली सुनवाई की तारीख तय की है। अगली सुनवाई में मुख्य सचिव को यह स्पष्ट करना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन किस प्रकार किया जा रहा है और भविष्य में अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कैसे अपनाई जाएगी।





