
ऋषिकेश। नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जोंक क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही सीवर लाइन और एसटीपी क्षमता की समस्या जल्द ही समाप्त होने वाली है। वेद निकेतन के पास 84 कुटिया मार्ग के किनारे तीन एमएलडी का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट तेजी से निर्माणाधीन है, जिसे जनवरी 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। नया प्लांट तैयार होने के बाद क्षेत्र में सीवर प्रबंधन अधिक सुचारू हो जाएगा और गंगा में प्रवाहित होने वाली गंदगी पर भी रोक लगेगी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
स्वर्गाश्रम जोंक क्षेत्र में करीब 15 वर्ष पहले तीन एमएलडी क्षमता वाला पहला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया गया था। बढ़ती आबादी और सीवर कनेक्शन के चलते उसकी क्षमता अब पर्याप्त नहीं रह गई है। सीवर की पूरी मात्रा पंप नहीं हो पाने से कई बार गंगा में गंदगी प्रवाहित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
स्थानीय लोगों ने इसे लेकर कई बार निकाय और शासन से क्षमता बढ़ाने की मांग की थी।
आधिकारिक जानकारी
शासन ने स्थिति को देखते हुए करीब 8 करोड़ रुपये की लागत से एक और तीन एमएलडी का एसटीपी स्वीकृत किया है। निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम की ओर से वर्ष 2023 में निर्माण कार्य शुरू किया गया था। अधिकारियों के अनुसार जनवरी 2026 तक प्लांट पूरी तरह तैयार हो जाएगा।
नया प्लांट जुड़ने के बाद क्षेत्र में कुल क्षमता बढ़कर छह एमएलडी हो जाएगी, जिससे सीवर प्रबंधन में स्थायी सुधार आएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सीवर लाइन बार-बार ओवरफ्लो होने और गंगा में गंदगी जाने से क्षेत्र की साफ-सफाई और धार्मिक महत्व को नुकसान पहुंच रहा था। वे उम्मीद जता रहे हैं कि नया एसटीपी बनने के बाद समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी।
विशेषज्ञ/अधिकारी का उद्धरण
“जनवरी 2026 तक निर्माणाधीन सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का कार्य पूरा हो जाएगा। उम्मीद है कि मार्च-अप्रैल 2026 में इसका संचालन भी शुरू कर दिया जाएगा।” — दीपक वत्स, सहायक अभियंता, निर्माण एवं अनुरक्षण इकाई (गंगा), उत्तराखंड पेयजल निगम
आगे क्या?
निर्माण पूरा होने के बाद नए प्लांट का ट्रायल रन किया जाएगा। इसके बाद दोनों एसटीपी को एकीकृत कर निकाय क्षेत्र के सीवर तंत्र को पूरी क्षमता के साथ संचालित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि नया सिस्टम शुरू होने से क्षेत्र में पर्यावरणीय प्रभाव भी बेहतर होगा।






