
गजल्ड: गजल्ड क्षेत्र में पिछले कई दिनों से सक्रिय हमलावर गुलदार की सटीक पहचान कर उसे ढेर करने में वन विभाग और स्थानीय शूटरों की टीम सफल रही। वैज्ञानिक पद्धति, कैमरा ट्रैप, पगमार्क विश्लेषण और प्रत्यक्ष अवलोकन के आधार पर गुलदार की पुष्टि होने के बाद 10 दिसंबर की शाम शिकारी जॉय हुकिल ने जोखिम भरी परिस्थितियों में सटीक निशाना लगाकर उसे मार गिराया, जिससे क्षेत्र में दोबारा हमले की आशंका समाप्त हो गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
गजल्ड क्षेत्र में 4 दिसंबर को गुलदार द्वारा ग्रामीण पर हमले की घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय का माहौल फैल गया था। गुलदार लगातार आसपास के जंगलों में सक्रिय दिख रहा था, और मवेशियों पर हमले भी बढ़ गए थे। ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए वन विभाग ने वैज्ञानिक तरीकों से उसकी पहचान सुनिश्चित करने का निर्णय लिया।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग की टीम ने 4 दिसंबर की घटना के तुरंत बाद क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए, पगमार्क एकत्र किए और प्रेशर इम्प्रेशन पैड बिछाकर गुलदार की गतिविधियों की निगरानी शुरू की। विभागीय कर्मियों ने रात-दिन गश्त कर गुलदार के मूवमेंट पैटर्न का अध्ययन किया।
7 से 10 दिसंबर के बीच मिले सबूत — कैमरा फोटो, पगमार्क मैचिंग, मवेशियों पर हमले का पैटर्न और प्रत्यक्ष अवलोकन—के आधार पर यह स्पष्ट हो गया कि यह वही हिंसक गुलदार है जिसने ग्रामीण पर हमला किया था। पूर्ण पुष्टि के बाद विशेषज्ञ शूटरों को अनुमति दी गई और लक्ष्य जारी कर दिया गया।
शिकारी जॉय हुकिल की बहादुरी
अनुभवी स्थानीय शूटर जॉय हुकिल और राकेश चंद्र बड़थ्वाल को विभागीय टीम में शामिल किया गया। दोनों ने लगातार तीन दिनों तक जंगल में जोखिम उठाते हुए गुलदार की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी।
10 दिसंबर की शाम लगभग 7:05 बजे, कम दृश्यता और कठिन परिस्थितियों के बावजूद जॉय हुकिल ने अत्यंत सटीक निशाना लगाया और गुलदार को उसी समय ढेर कर दिया। इस कार्रवाई से क्षेत्र में दोबारा मानव या मवेशियों पर हमले की संभावनाएं समाप्त हो गईं।
ग्रामीणों ने दोनों शिकारियों का फूलमालाओं के साथ सम्मान कर उनकी बहादुरी की सराहना की।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में आतंक का माहौल था। लोग रात में बाहर निकलने से कतराते थे और बच्चों को अकेले भेजना बंद कर दिया था। ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग और शिकारियों की त्वरित कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को बड़ी राहत दी है। कई ग्रामीणों ने यह भी कहा कि यदि समय पर कार्रवाई न होती तो हालात और गंभीर हो सकते थे।
आगे क्या?
गुलदार को ढेर किए जाने के बाद अब उसका मेडिकल परीक्षण और डीएनए जांच की जा रही है, जिससे वैज्ञानिक रूप से पुष्टि हो सके कि यह वही गुलदार था जो 4 दिसंबर की घटना में शामिल था। वन विभाग ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया को दस्तावेज़ के रूप में दर्ज किया जाएगा।
इसके साथ ही विभाग आसपास के क्षेत्रों में निगरानी जारी रखेगा ताकि यदि कोई अन्य जंगली पशु मानव बस्तियों की ओर बढ़े तो तुरंत कार्रवाई की जा सके।







