
देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पाई जाने वाली धार्मिक और औषधीय वनस्पति टिमरू (जैंथोजाइलम आरमेटम) अब वैश्विक स्तर पर अपना स्थान बना रही है। टिमरू के बीजों से बने परफ्यूम को हाउस ऑफ हिमालयाज के माध्यम से मिली सफलता के बाद सरकार इसके कृषिकरण और बाजार विस्तार की दिशा में बड़े कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में 13 दिसंबर को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में डाबर इंडिया और सगंध पौधा केंद्र (कैप) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
टिमरू उत्तराखंड के पर्वतीय अंचलों में धार्मिक, सांस्कृतिक और आयुर्वेदिक महत्व रखता है। इसकी कांटेदार टहनियों को मंदिरों और देवस्थलों में उपयोग किया जाता है, जबकि कुछ क्षेत्रों में लोग इसे दंत मंजन के रूप में भी इस्तेमाल करते रहे हैं। वर्ष 2021–22 में कैप ने टिमरू के बीजों से इत्र और परफ्यूम तैयार करने की पहल की, जिसे दिसंबर 2023 में देहरादून में हुए वैश्विक निवेशक सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भेंट किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री ने इस उत्पाद के लिए बाजार तलाशने के निर्देश दिए, जिसके बाद इसे ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ ब्रांड में सम्मिलित किया गया।
अधिकारिक जानकारी
सरकार के अनुसार टिमरू परफ्यूम को बाजार में अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। हाउस ऑफ हिमालयाज के तहत कैप द्वारा 100 एमएल की 2100 बोतलें उपलब्ध कराई गई हैं और अब तक कुल 97 लाख रुपये की बिक्री हो चुकी है। इसके लिए पिथौरागढ़, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों से अब तक 25 क्विंटल टिमरू बीज खरीदे जा चुके हैं।
सरकार का अगला फोकस टिमरू के व्यापक कृषिकरण पर है। पिथौरागढ़ जिले में ‘टिमरू घाटी’ विकसित करने की योजना बनाई गई है, जबकि अन्य पहाड़ी जिलों में भी इसे बढ़ावा दिया जाएगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पर्वतीय क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि यदि टिमरू का व्यावसायिक उत्पादन बढ़ता है, तो इससे पहाड़ में खाली पड़ी भूमि का बेहतर उपयोग हो सकेगा। स्थानीय युवाओं ने भी उम्मीद जताई है कि इस पहल से पहाड़ में आजीविका के नए अवसर खुलेंगे।
विशेषज्ञ टिप्पणी
कैप के निदेशक डॉ. नृपेंद्र चौहान ने बताया कि डाबर इंडिया के साथ होने वाला एमओयू किसानों को सीधा बाजार दिलाने की दिशा में निर्णायक कदम है। डाबर न केवल प्लांटिंग मटीरियल और तकनीकी सहयोग देगा, बल्कि उचित दाम पर किसानों से टिमरू के बीज खरीदने के लिए भी सहमत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी पर्वतीय कृषि–अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगी।
संख्या और तथ्य
अब तक टिमरू परफ्यूम की 2100 बोतलें बेची गई हैं। कुल बिक्री मूल्य 97 लाख रुपये तक पहुंच चुका है। तीन जिलों से 25 क्विंटल टिमरू बीज खरीदे गए। 13 दिसंबर को डाबर इंडिया और कैप के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर होंगे।
आगे क्या होगा
एमओयू के बाद टिमरू के संगठित कृषिकरण और बड़े पैमाने पर बाजार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज होगी। सरकार उम्मीद कर रही है कि अगले चरण में टिमरू आधारित नए उत्पादों का विकास भी संभव हो सकेगा। टिमरू की खेती बढ़ने से किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने की भी संभावना है।







