
देहरादून: उत्तराखंड में वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम ढूंढने की प्रक्रिया अब और सरल होने जा रही है। राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय अपनी वेबसाइट पर मतदाता खोज प्रणाली को आसान बना रहा है, जिसके तहत अब मतदाता केवल अपने गली, मोहल्ले और क्षेत्र का नाम डालकर भी 2003 की मतदाता सूची में अपना नाम खोज सकेंगे। यह बदलाव इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले चल रहे प्री-एसआईआर कार्य के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं को पुराने रिकॉर्ड खोजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्रदेश में इस समय विशेष गहन पुनरीक्षण से पहले प्री-एसआईआर का कार्य चल रहा है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर वर्तमान मतदाता सूची में शामिल मतदाताओं का वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मिलान कर रहे हैं। फिलहाल 38 वर्ष से अधिक आयु वाले मतदाताओं की वोटर मैपिंग की जा रही है, ताकि एसआईआर शुरू होने पर सत्यापन में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
आधिकारिक जानकारी
निर्वाचन विभाग के अनुसार, वर्ष 2003 की मतदाता सूची पहले से ही मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तराखंड की वेबसाइट पर उपलब्ध है। अभी तक मतदाताओं को अपने और पिता के नाम के आधार पर विधानसभा क्षेत्र खोजकर फिर संबंधित पन्ने पर नाम ढूंढना पड़ता था, जो एक लंबी प्रक्रिया थी। अब इस प्रणाली को सरल बनाते हुए गली, मोहल्ला और क्षेत्र के नाम से भी खोज की सुविधा जोड़ी जा रही है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कई मतदाताओं का कहना है कि 2003 की सूची में नाम ढूंढना अब तक काफी जटिल रहा है। विशेष रूप से वे मतदाता जिन्होंने समय के साथ जिला या विधानसभा क्षेत्र बदला है, उन्हें अधिक परेशानी हुई। महिलाओं का कहना है कि विवाह के बाद दूसरे जिले या क्षेत्र में बसने के कारण उनका नाम पुराने पते पर दर्ज था, जिससे खोज करना कठिन हो जाता था।
आंकड़े / तथ्य
प्री-एसआईआर के दौरान अभी मुख्य रूप से 38 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं का मिलान किया जा रहा है। विभागीय अनुभव के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाता ऐसे हैं जिनका नाम 2003 में किसी अन्य स्थान पर दर्ज था, जिसके कारण सत्यापन में देरी हो रही थी।
आगे क्या होगा
सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तूदास ने बताया कि मतदाता खोज प्रक्रिया को सरल बनाने का कार्य अंतिम चरण में है और इसे जल्द ही लागू कर दिया जाएगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद, यदि किसी मतदाता का नाम पुष्टि के साथ सामने आता है, तो एक क्लिक में वह सीधे उस पन्ने पर पहुंच सकेगा, जहां उसका क्रमांक और बूथ दर्ज होगा। इससे एसआईआर के दौरान सत्यापन प्रक्रिया तेज और सुचारू होने की उम्मीद है।






