
यमकेश्वर — यमकेश्वर विकासखंड के हेंवलघाटी क्षेत्र में रिजॉर्ट और कैंपों से निकलने वाला बचा हुआ भोजन और अपशिष्ट जंगल में फेंके जाने से वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ती जा रही हैं। सब्जियों के अवशेष, बचा खाना और मांस की हड्डियों की तलाश में जंगली जानवर रात के समय आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में डर का माहौल है और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने इस लापरवाही पर कार्रवाई की मांग की है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यमकेश्वर क्षेत्र के हेंवल नदी तट और आसपास के गांवों में हाल के महीनों में वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ी है। विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में मानव द्वारा फेंका गया खाद्य अपशिष्ट वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को बदल देता है, जिससे वे भोजन के लिए आबादी क्षेत्रों के पास आने लगते हैं।
आधिकारिक जानकारी
वन विभाग के अनुसार, यमकेश्वर विकासखंड के हेंवल नदी से सटे कई कैंप और रिजॉर्ट संचालकों द्वारा खराब रसद सामग्री, सब्जियों के अवशेष और बचा हुआ भोजन या तो जंगल में फेंका जा रहा है या नदी में बहाया जा रहा है। विभाग ने कहा है कि ऐसे स्थलों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ग्राम पंचायत सिंदूड़ी के पूर्व प्रधान अरुण जुगलान ने बताया कि हेंवल नदी के किनारे स्थित कई कैंप और रिजॉर्ट के पास रात के समय वन्यजीव पहुंच रहे हैं, क्योंकि वहां भोजन के अवशेष पड़े रहते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और रात के समय बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
आंकड़े / तथ्य
हेंवलघाटी क्षेत्र में कई गांव वन क्षेत्र से सटे हुए हैं।
रात के समय रिजॉर्ट और कैंपों के आसपास वन्यजीवों की मौजूदगी की शिकायतें लगातार मिल रही हैं।
आगे क्या?
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि यमकेश्वर क्षेत्र में जिन कैंप और रिजॉर्ट संचालकों द्वारा अपशिष्ट फेंका जा रहा है, उन्हें चिन्हित किया जाएगा। अपशिष्ट पाए जाने पर वन अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी और प्रभावित स्थानों की सफाई कराई जाएगी।







