
यमकेश्वर: यमकेश्वर क्षेत्र में सड़क किनारे लगे कई हैंडपंपों की महीनों बाद मरम्मत कर दी गई है, जिससे स्थानीय लोगों को लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या से राहत मिली है। खराब हैंडपंपों के कारण ग्रामीणों, स्कूली छात्रों और राहगीरों को पानी के लिए परेशान होना पड़ रहा था। ग्रामीणों की शिकायतों और क्षेत्रीय विधायक को पत्र सौंपे जाने के बाद जल संस्थान कोटद्वार ने कार्रवाई करते हुए आधा दर्जन से अधिक हैंडपंपों को दुरुस्त करा दिया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यमकेश्वर क्षेत्र के कई गांवों और सड़कों पर लगे हैंडपंप लंबे समय से खराब पड़े थे। पानी की वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण स्थानीय ग्रामीणों को खासतौर पर गर्मियों और यात्रियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। कई बार जनप्रतिनिधियों और जल संस्थान अधिकारियों से शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हो पा रहा था।
आधिकारिक जानकारी
जल संस्थान कोटद्वार द्वारा हाल ही में क्षेत्र के कई स्थानों पर लगे हैंडपंपों की मरम्मत करवाई गई है। मरम्मत के बाद अधिकांश हैंडपंपों में पानी आना शुरू हो गया है। विभाग के अनुसार, जिन हैंडपंपों का भूमिगत जलस्तर सूख चुका है या जो पर्याप्त गहराई तक नहीं खोदे गए थे, उन्हें दुरुस्त करना संभव नहीं हो पाया है। ऐसे स्थानों पर गहराई बढ़ाकर नए हैंडपंप लगाए जाने की योजना है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
पातली निवासी संदीप रावत ने बताया कि घट्टूघाड, रतापानी, बिनक, जुलेडी, गैंडखाल, बिथ्याणी तहसील, भृगुखाल, बोरगांव, कस्याली, बिस्सी, उमरोली और दमराडा जैसे क्षेत्रों में हैंडपंपों में अब पानी आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि मरम्मत होने से दैनिक जरूरतों के साथ-साथ राहगीरों और छात्रों को भी बड़ी राहत मिली है।
संख्या / आंकड़े
करीब आधा दर्जन से अधिक हैंडपंप दुरुस्त किए गए हैं।
कई हैंडपंप वर्षों पुराने और कम गहराई के होने के कारण उपयोग योग्य नहीं पाए गए।
आगे क्या होगा
जल संस्थान के अनुसार, जिन स्थानों पर भूमिगत जल सूख चुका है, वहां नए और अधिक गहराई वाले हैंडपंप लगाए जाएंगे। क्षेत्र में पेयजल आपूर्ति को स्थायी रूप से मजबूत करने के लिए आगे भी कार्य किए जाएंगे।







