
गढ़वाल — जिले के विभिन्न क्षेत्रों में हाल ही में वन्यजीवों की गतिविधि बढ़ने के बाद वन विभाग सतर्क हो गया है। ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विभाग ने टोल फ्री नंबर 1926 जारी किया है, ताकि किसी भी वन्यजीव की मौजूदगी की सूचना तुरंत विभाग तक पहुंच सके। विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दे रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पर्वतीय क्षेत्रों में भालू, गुलदार और अन्य वन्यजीवों की गतिविधि सर्दियों में अक्सर बढ़ जाती है। भोजन की तलाश में ये जानवर आबादी वाले क्षेत्रों तक आ जाते हैं, जिससे मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ने का खतरा रहता है। हाल के दिनों में ऐसी गतिविधियों के बढ़ने पर वन विभाग ने कदम तेज कर दिए हैं।
अधिकारियों की जानकारी
डीएफओ गढ़वाल अभिमन्यु सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यदि लोग अपने घरों के आसपास की झाड़ियों को काटकर खुला क्षेत्र बना लें, समूह में यात्रा करें और बच्चों को अकेला न छोड़ें, तो भालू या अन्य वन्यजीवों से सामना होने की स्थिति में जोखिम काफी कम हो जाता है।
डीएफओ ने कहा कि विभाग जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर अभियान चला रहा है। पंपलेट वितरण, जागरूकता बैठकें, सोशल मीडिया संदेश और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से लोगों को सुरक्षा उपायों की जानकारी दी जा रही है। विभाग की टीमें नियमित गश्त कर ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्रति सतर्क रहने की सलाह भी दे रही हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि हाल के दिनों में खेतों और घरों के आसपास भालू और अन्य वन्यजीवों को देखा गया है। वन विभाग की जागरूकता गतिविधियों से लोगों में सतर्कता जरूर बढ़ी है। ग्रामीणों का कहना है कि टोल फ्री नंबर मिलने से अब वे तुरंत सूचना दे सकेंगे।
डीएफओ की अपील
अभिमन्यु सिंह ने ग्रामीणों से अपील की कि किसी भी क्षेत्र में वन्यजीवों की हलचल दिखे तो तत्काल टोल फ्री नंबर 1926 पर संपर्क करें। उन्होंने कहा कि समय रहते सूचना मिलने से विभाग की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच सकती हैं और आवश्यक कार्रवाई कर सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विभाग को सहयोग कर मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को काफी कम किया जा सकता है।
आगे क्या?
वन विभाग ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में गश्त बढ़ाई जाएगी और हाई-रिस्क क्षेत्रों में अतिरिक्त चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य है कि सर्दियों के मौसम में मानव–वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित किया जाए और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।






