
ऋषिकेश: चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना साइट पर बीते मंगलवार रात हुए हादसे को लेकर टीएचडीसी की आंतरिक जांच में लोको वैगन (ट्रॉली) ऑपरेटर की लापरवाही सामने आई है। जांच निष्कर्षों के आधार पर टीएचडीसी की सिफारिश पर कार्यदायी संस्था हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने संबंधित ऑपरेटर को बर्खास्त कर दिया है। हादसे में बड़ी संख्या में कर्मी घायल हुए थे, जिसके बाद प्रबंधन ने जांच तेज करते हुए जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू की।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना में टनल के भीतर कर्मियों के आवागमन के लिए लोको वैगन ट्रॉली का उपयोग किया जाता है। हादसे के बाद सुरक्षा मानकों और संचालन प्रक्रिया पर सवाल उठे थे, जिन्हें देखते हुए टीएचडीसी ने प्राथमिक जांच शुरू की।
आधिकारिक जानकारी
गुरुवार को ऋषिकेश स्थित टीएचडीसीआईएल के कॉरपोरेट कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कार्यपालक निदेशक कुमार शरद ने बताया कि प्रबंधन हादसे को बेहद गंभीरता से ले रहा है। प्राथमिक जांच में ट्रॉली की गति नियंत्रित न होने के पीछे ब्रेक फेल जैसे तकनीकी कारण प्रतीत हो रहे हैं। जांच में यह भी सामने आया कि दूसरी खड़ी ट्रॉली में ऑपरेटर मौजूद नहीं था, जो गंभीर लापरवाही मानी गई। इसी आधार पर मानव संसाधन दायित्व संभाल रही हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने संबंधित ऑपरेटर की बर्खास्तगी की कार्रवाई की है।
सुरक्षा मानकों पर जांच
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि सुपरवाइजर स्तर पर भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी की आशंका की जांच की जा रही है। यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्राथमिक जांच अगले कुछ दिनों में पूरी होने की संभावना है।
घायलों की स्थिति और सहायता
कुमार शरद ने बताया कि हादसे में घायल 81 कर्मियों में से 76 को गोपेश्वर चिकित्सालय से छुट्टी दे दी गई है, जबकि शेष को भी जल्द छुट्टी मिलने की उम्मीद है। टीएचडीसीआईएल प्रबंधन उपचार में पूरा सहयोग कर रहा है और पीड़ित कर्मियों व उनके परिवारों को नियमानुसार आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाएगी। वार्ता में मुख्य महाप्रबंधक (प्रशासन एवं कार्मिक) डॉ. एएन त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
आगे क्या होगा
प्राथमिक जांच पूरी होने के बाद विस्तृत निष्कर्षों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम और अतिरिक्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।






