
देहरादून: भाजपा विधायक विनोद चमोली ने कहा है कि उत्तराखंड में हो रहा विकास सिर्फ वर्तमान सरकार का परिणाम नहीं है, बल्कि इसमें पिछली सभी सरकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि धामी सरकार पुनः सत्ता में आती है तो इसका श्रेय उन कार्यों को भी जाता है जो वर्षों से गतिमान हैं और जिनकी नींव पूर्व सरकारों ने रखी थी।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में विकास योजनाओं और उनकी निरंतरता को लेकर राजनीतिक चर्चा लंबे समय से चलती रही है। कई बड़ी परियोजनाएँ ऐसी हैं, जिनकी शुरुआत पिछली सरकारों ने की और उनका कार्यान्वयन वर्तमान सरकार में जारी है। इसी संदर्भ में विधायक विनोद चमोली ने अपना बयान दोहराया है।
आधिकारिक जानकारी
विनोद चमोली ने कहा कि विकास एक सतत प्रक्रिया है और इसमें लंबा समय लगता है। कई परियोजनाएँ वर्षों तक चलती हैं और उनका श्रेय किसी एक सरकार या मुख्यमंत्री को देना उचित नहीं होगा।
उन्होंने ऑल वेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेलवे लाइन और अन्य कई महत्वपूर्ण योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पर वर्षों से काम चल रहा है और कई सरकारों ने अपने-अपने कार्यकाल में इसमें योगदान दिया है।
चमोली ने कहा, “अगर धामी जी की सरकार दोबारा रिपीट हुई तो उसमें पिछली सरकारों के कामों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विकास कभी एक दिन में नहीं होता।”
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान धामी सरकार के नेतृत्व में कई ऐसी महत्वपूर्ण योजनाएँ धरातल पर उतरी हैं जिन्हें राज्य वर्षों से इंतजार कर रहा था। साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कई वर्तमान निर्णयों का परिणाम आने वाले वर्षों में दिखाई देगा, चाहे सरकार कोई भी हो।
अभी तक विपक्ष की ओर से उनके इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में निरंतरता जरूरी है, चाहे सरकार किसी भी दल की हो। कुछ नागरिकों ने इसे सकारात्मक बयान बताते हुए कहा कि यह सहयोगात्मक राजनीति का उदाहरण है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े राज्यों में लंबे समय चलने वाली परियोजनाओं को लेकर कई बार राजनीतिक श्रेय को लेकर विवाद होता है। चमोली का यह बयान विकास के लिए साझा जिम्मेदारी की ओर संकेत करता है।
आगे क्या?
राज्य में आगामी चुनावों से पहले विकास कार्यों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है। चमोली के इस बयान के बाद उम्मीद है कि विभिन्न दलों के बीच परियोजनाओं की जिम्मेदारी और श्रेय को लेकर बहस और आगे बढ़ेगी।






