
देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की तिथि अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन राज्य निर्वाचन विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत वर्ष 2003 की मतदाता सूची को वर्तमान सूची से मिलाया जा रहा है, ताकि आगामी पुनरीक्षण के दौरान सत्यापन कार्य सरल और तेज़ हो सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
भारत निर्वाचन आयोग ने देश के कई राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की है। बिहार में शुरुआत के बाद वर्तमान में 12 राज्यों में यह कार्य चल रहा है। माना जा रहा है कि उत्तराखंड में भी फरवरी से यह प्रक्रिया प्रारंभ हो सकती है।
अधिकारिक जानकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने बताया कि वर्ष 2003 और 2025 की मतदाता सूचियों का मिलान किया जा रहा है।
इससे यह पता लगाया जा रहा है कि कितने मतदाता लंबे समय से एक ही पते पर हैं, और कितने ऐसे हैं जिन्होंने जिला बदल दिया है।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रक्रिया से लगभग 50–60 प्रतिशत मतदाताओं का मिलान पहले ही हो जाएगा।
जिन मतदाताओं के माता–पिता के नाम 2003 की मतदाता सूची में मौजूद हैं, उन्हें आगामी SIR प्रक्रिया में दस्तावेज जमा नहीं करने पड़ेंगे। केवल वे मतदाता दस्तावेज देंगे जिनके नाम बाद में शामिल हुए थे।
स्थानीय प्रतिक्रिया / जन-परामर्श
निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि यदि किसी ने अपना पता या विधानसभा क्षेत्र बदला है, तो इसकी जानकारी अपने बूथ लेवल अधिकारी को दें, ताकि सूची में सही जानकारी दर्ज हो सके।
विशेष निर्देश
मुख्य निर्वाचन अधिकारी पुरुषोत्तम ने बताया कि दोनों वर्षों की मतदाता सूचियां आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
उन्होंने कहा कि यह तुलनात्मक अध्ययन आगामी विशेष पुनरीक्षण को अधिक सटीक बनाने में सहायक होगा।
आगे क्या
SIR की आधिकारिक घोषणा होते ही बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक सत्यापन अभियान शुरू होगा। विभाग का लक्ष्य है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची पूरी तरह दुरुस्त कर दी जाए।







