
देहरादून: उत्तराखंड में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को मतदाताओं और बीएलओ के लिए अधिक सुगम बनाने की दिशा में तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने प्री-एसआईआर चरण पर जोर देते हुए सभी जिलों में वोटर लिस्ट मैपिंग, बीएलओ की डिजिटल सुविधा और बूथ अवेयरनेस ग्रुप को सक्रिय करने के निर्देश जारी किए हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
चुनाव आयोग हर वर्ष मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन बनाए रखने के लिए पुनरीक्षण प्रक्रिया संचालित करता है। इस बार विशेष गहन पुनरीक्षण को व्यवस्थित और सरल बनाने के उद्देश्य से कई तकनीकी और व्यवस्थागत सुधार किए जा रहे हैं। पिछले वर्षों में एसआईआर प्रक्रिया में दस्तावेजों की कमी और बीएलओ पर अधिक भार जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं, जिन्हें इस बार दूर करने की कोशिश की जा रही है।
औपचारिक जानकारी
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने प्री-एसआईआर तैयारियों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सभी जिलों में बीएलओ पुराने मतदाताओं की जानकारी को वर्तमान वोटर लिस्ट के अनुसार मिलान कर रहे हैं। वर्ष 2003 के लगभग 53 लाख मतदाताओं का डेटा मैप किया जा रहा है, जिससे एसआईआर फॉर्म बनाने की प्रक्रिया काफी सरल हो जाएगी।
इस बार मतदाताओं को फॉर्म के साथ अपने दस्तावेज लगाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे केवल अपनी फोटो लगाकर फॉर्म पर हस्ताक्षर करेंगे और बीएलओ के पास जमा कर सकेंगे। बीएलओ के काम को आसान बनाने के लिए चुनाव आयोग ने एक अलग मोबाइल एप भी तैयार किया है, जिससे मैदानी कार्य और रिकॉर्ड अपडेटिंग प्रक्रिया तेज होगी।
डॉ. पुरुषोत्तम ने निर्देश दिए हैं कि सभी मतदान केंद्रों पर बूथ अवेयरनेस ग्रुप सक्रिय किए जाएं। एसआईआर के दौरान इन समूहों की जिम्मेदारी होगी कि वे उन मतदाताओं के घर तक पहुंचें जिनके एसआईआर फॉर्म वापस नहीं आए हैं। स्थानीय स्तर पर बातचीत और पड़ोसी की जानकारी के आधार पर इन्हें कारण बताना होगा, जिससे बीएलओ को बार-बार घर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और वह अपना काम अधिक व्यवस्थित ढंग से कर सकेगा।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अक्सर एसआईआर प्रक्रिया जटिल होने के कारण कई मतदाता समय पर फॉर्म जमा नहीं कर पाते। उनका मानना है कि इस बार यदि फॉर्म प्रक्रिया सरल रखी जाए और बीएलओ को तकनीकी सहायता मिले, तो बड़े पैमाने पर मतदाताओं का रिकॉर्ड अधिक व्यवस्थित हो सकेगा। कुछ शिक्षकों और पंचायत प्रतिनिधियों ने कहा कि अवेयरनेस ग्रुप की सक्रियता ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष रूप से लाभदायक होगी।
शहरी क्षेत्रों में चुनौती
निर्वाचन विभाग का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में एसआईआर सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है, क्योंकि लोग दरवाजे पर बीएलओ या दस्तावेज सत्यापन टीमों का सहयोग कम कर पाते हैं। कई मतदाता जानकारी के अभाव में फॉर्म वापस नहीं करते, जिससे पुनरीक्षण धीमा हो जाता है। विभाग अब शहरी क्षेत्रों के लिए अलग जागरूकता योजना तैयार कर रहा है ताकि फॉर्म एकत्रित करने में कठिनाई कम हो सके।
आगे क्या?
चुनाव आयोग अगले कुछ सप्ताह में एसआईआर की गतिविधियों का मूल्यांकन करेगा और जिलों में प्रगति रिपोर्ट की नियमित समीक्षा की जाएगी। आयोग का लक्ष्य है कि आगामी पुनरीक्षण के बाद राज्य की मतदाता सूची अधिक साफ, सटीक और विवाद-मुक्त बने, जिससे चुनाव प्रक्रिया और अधिक सुचारु हो सके।






