
देहरादून। उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं के घरों में स्मार्ट मीटरों की संख्या तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन अब इन मीटरों पर भरोसे की रोशनी कुछ फीकी पड़ती नजर आ रही है। देहरादून, हल्द्वानी और नैनीताल जैसे शहरों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं ने समान खपत के बावजूद बिजली बिल कई गुना बढ़ने की शिकायतें दर्ज कराई हैं।
किसी उपभोक्ता का बिल दोगुना आया है, तो किसी को हजारों से लेकर लाखों रुपये तक का बिल थमा दिया गया है। देहरादून में तो नाराज पार्षदों ने बिजली विभाग कार्यालय का घेराव भी किया।
निगम का दावा: पुराने मीटरों की त्रुटियां और बकाया डेटा कारण
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) के अधिकारियों का कहना है कि पुराने मीटरों की गड़बड़ियां और लंबित बकाया का डेटा स्मार्ट मीटर सिस्टम में जुड़ने से भ्रम की स्थिति बनी है। निगम के अनुसार, स्मार्ट मीटर दीर्घकाल में पारदर्शिता और सटीक बिलिंग सुनिश्चित करेंगे।
“पुराने मीटर की खामियों के कारण कई उपभोक्ताओं को पुराने बिल जोड़कर दिए गए हैं, जिससे बिल बढ़ा हुआ लग रहा है।”
— अनिल यादव, प्रबंध निदेशक, यूपीसीएल
उपभोक्ताओं की मांग: पहले जांच, फिर वसूली
स्मार्ट मीटरों का विरोध कर रहे उपभोक्ताओं का कहना है कि बिना पूर्व सूचना और सहमति के मीटर बदले जा रहे हैं। पहले जहां दो महीने का बिल लगभग 1000 रुपये आता था, अब एक महीने का बिल ही 2000 रुपये से अधिक पहुंच गया है।
कई उपभोक्ताओं का आरोप है कि पुराने बिल की राशि नए मीटर में जोड़कर एकमुश्त वसूली की जा रही है।
उनकी मांग है कि –
- हर घर में चेक मीटर लगाकर खपत की जांच की जाए।
- जांच रिपोर्ट आने तक नए बिलों की वसूली पर रोक लगाई जाए।
निगम की सफाई: गलती मिली तो सुधार होगा
ऊर्जा निगम के अनुसार, शिकायतों की जांच की जा रही है और जहां त्रुटियां पाई जा रही हैं, वहां बिल संशोधित किए जा रहे हैं या मीटर बदले जा रहे हैं। उपभोक्ताओं के लिए टोल-फ्री नंबर 1912 जारी किया गया है ताकि वे अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें।
निगम का कहना है कि जैसे-जैसे नया सिस्टम स्थिर होगा, मीटरिंग और बिलिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य में उपभोक्ताओं को लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों की राय: टेस्टिंग और जागरूकता अनिवार्य
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि—
- हर मीटर लगाने से पहले थर्ड-पार्टी टेस्टिंग की व्यवस्था होनी चाहिए।
- उपभोक्ताओं को रीडिंग, सीरियल नंबर और सर्टिफिकेशन की जानकारी दी जानी चाहिए।
- साथ ही उपभोक्ताओं के लिए जागरूकता अभियान या वर्कशॉप आयोजित किए जाने चाहिए ताकि वे स्मार्ट मीटर की कार्यप्रणाली समझ सकें।





