
देहरादून: उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग ने नौ विशेषज्ञ फर्मों को राज्यभर में ब्लैक स्पॉट और क्रैश बैरियर मूल्यांकन कार्य के लिए सूचीबद्ध किया है। इन फर्मों का पंजीकरण एक वर्ष के लिए (31 अगस्त 2026 तक) किया गया है।
राज्य में हर वर्ष 1000 से 1400 लोगों की मौत सड़क हादसों में होने के मद्देनज़र विभाग ने यह कदम उठाया है।
सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर हुआ विभाग
परिवहन विभाग और पुलिस की लगातार कोशिशों के बावजूद उत्तराखंड में सड़क हादसों का आंकड़ा चिंताजनक बना हुआ है।
राज्य के पर्वतीय मार्गों से लेकर मैदानी सड़कों तक कई ब्लैक स्पॉट (दुर्घटनाग्रस्त क्षेत्र) हैं जहाँ हर साल दर्जनों हादसे होते हैं।
इन्हें चिन्हित करने और तकनीकी मूल्यांकन के लिए अब नौ विशेषज्ञ फर्मों को नियुक्त किया गया है।
फर्मों की भूमिका और कार्यक्षेत्र
ये फर्में राज्यभर में ब्लैक स्पॉट की पहचान, मूल्यांकन, सुधार सुझाव, क्रैश बैरियर की मजबूती की जांच और सड़क डिजाइन सुधार रिपोर्ट तैयार करेंगी। सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी समय-समय पर बजट जारी करेगी ताकि इन रिपोर्टों के आधार पर सुधारात्मक कार्यवाही की जा सके।
सूचीबद्ध फर्मों के नाम
परिवहन विभाग द्वारा जिन फर्मों को सूचीबद्ध किया गया है, उनके नाम इस प्रकार हैं —
- एंटीक बिल्टेक, राजस्थान
- एसएन इंफ्रा डेवलपमेंट, मध्य प्रदेश
- टेकमोडेक, राजस्थान
- ट्रांसलिंक इंफ्रास्ट्रक्चर, गुजरात
- क्राफ्ट्स कंसल्टेंट, हरियाणा
- कंसल्टिंग इंजीनियर ग्रुप, जयपुर
- श्वेता टेक्नोफाइल, गाजियाबाद
- जयशंकर झा, नोएडा
- टेक्निकल कंसल्टेंसी सर्विसेज, देहरादून
इन फर्मों की सूची अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह द्वारा जारी की गई है।
एजेंसियों की मान्यता अवधि और दायित्व
इन सभी फर्मों की सूचीबद्धता अगले साल 31 अगस्त 2026 तक मान्य रहेगी। इस दौरान राज्य के किसी भी जिले में सड़क सुरक्षा से जुड़ी परियोजनाओं में इनकी तकनीकी सहायता ली जा सकेगी। प्रत्येक एजेंसी को अपने कार्य की रिपोर्ट राज्य सड़क सुरक्षा लीड एजेंसी को सौंपनी होगी।
हादसों के आंकड़े बताते हैं चिंता का स्तर
आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में हर वर्ष 1000 से 1400 लोगों की जान सड़क हादसों में जाती है, जबकि हजारों लोग घायल होते हैं।
राज्य के राष्ट्रीय राजमार्ग, चारधाम मार्ग और पर्वतीय क्षेत्र दुर्घटना संभावित माने जाते हैं। इसी को देखते हुए विभाग ने विशेषज्ञ एजेंसियों की मदद से तकनीकी मूल्यांकन प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है।
स्थानीय दृष्टिकोण
देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता महेन्द्र गैरोला ने कहा — “सड़क हादसे अब उत्तराखंड के लिए एक गंभीर समस्या बन गए हैं। ब्लैक स्पॉट्स का वैज्ञानिक मूल्यांकन और सुधार निश्चित रूप से जनहानि को कम करेगा।”
विभाग की प्रतिक्रिया
अपर परिवहन आयुक्त सनत कुमार सिंह ने कहा कि —
“राज्य के सभी जिलों में इन फर्मों की मदद से ब्लैक स्पॉट की पहचान और सुधार कार्य किए जाएंगे। विभाग का लक्ष्य आने वाले वर्षों में सड़क हादसों में कमी लाना है।”





