
देहरादून। उत्तराखंड में सड़क सुरक्षा को लेकर जारी अभियानों के बीच एक चिंताजनक तथ्य सामने आया है। जनवरी से अक्टूबर 2024 के बीच प्रदेश में हुई 1488 सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक 279 हादसे शाम छह से नौ बजे के बीच दर्ज किए गए, जिनमें 157 लोगों की मौत हुई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में प्रस्तुत यह आंकड़े इस समय अवधि में विशेष सतर्कता की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में सड़क दुर्घटनाएं लंबे समय से एक बड़ा चुनौतीपूर्ण मुद्दा रही हैं। पहाड़ी मार्ग, सीमित रोशनी, बढ़ता ट्रैफिक और शाम के समय वाहन चालकों की थकान जैसे कारक हादसों में वृद्धि का कारण बन रहे हैं। इससे पहले भी कई रिपोर्टों में यह समय स्लॉट ‘हाई-रिस्क’ बताया गया है।
जनवरी से अक्टूबर तक के नवीनतम आंकड़े इस समस्या की गंभीरता को फिर उजागर करते हैं।
आधिकारिक जानकारी
सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक में अधिकारियों ने बताया कि शाम छह से नौ बजे के बीच सबसे अधिक दुर्घटनाएं हो रही हैं। इस दौरान ऑफिस से लौटने वालों की भीड़ और शराब पीकर वाहन चलाने के मामले अधिक पाए जाते हैं।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस अवधि में सख्त निगरानी और पुलिस की सक्रियता बढ़ाने के निर्देश दिए। कई अधिकारियों ने माना कि शाम के बाद सड़कों पर पुलिस की मौजूदगी कम देखी जाती है।
आंकड़े — समय अनुसार दुर्घटना और मृत्यु
- सुबह 6–9: 170 दुर्घटनाएं, 89 मौतें
- सुबह 9–12: 176 दुर्घटनाएं, 78 मौतें
- दोपहर 12–3: 210 दुर्घटनाएं, 107 मौतें
- शाम 3–6: 225 दुर्घटनाएं, 133 मौतें
- शाम 6–9: 279 दुर्घटनाएं, 157 मौतें (सबसे अधिक)
- रात 9–12: 230 दुर्घटनाएं, 141 मौतें
- रात 12–3: 104 दुर्घटनाएं, 64 मौतें
- तड़के 3–6: 94 दुर्घटनाएं, 53 मौतें
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय निवासियों का कहना है कि शाम के समय कई मुख्य मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें ठीक से कार्य नहीं करतीं, जिससे दृश्यता कम हो जाती है।
कुछ व्यापारियों ने बताया कि ऑफिस टाइम में ट्रैफिक का दबाव अचानक बढ़ जाता है, और कई वाहन चालक जल्दबाजी में नियमों का पालन नहीं करते।
विशेषज्ञ टिप्पणी
परिवहन सुरक्षा से जुड़े विशेषज्ञ मानते हैं कि “उच्च-जोखिम वाले समय स्लॉट में पुलिस की गश्त बढ़ाना, सांस परीक्षण (अल्कोहल चेक) और स्पीड कंट्रोल आवश्यक कदम हैं।”
सड़क सुरक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार
बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने सड़क सुरक्षा कार्य में अहम योगदान देने वाले 10 व्यक्तियों को सम्मानित किया।
व्यक्तिगत श्रेणी
- डॉ. मधुर उनियाल, उमेश्वर सिंह रावत, प्रत्यूष सिंह, मोनिका (देहरादून)
- राजेंद्र सिंह रुक्मिणी (टिहरी)
- आनंद बल्लभ कश्मीरा, विनोद सिंह कुंवर, आलोक वर्मा (अल्मोड़ा)
सामूहिक श्रेणी
- सुमित ढुल, अक्षत बिडोला (जेपीआरआई, पुणे)
कार्यक्रम में उपस्थित
कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, सचिव शैलेश बगौली, बृजेश कुमार संत, वी. षणमुगम, अपर पुलिस महानिदेशक वी. मुरुगेशन, अपर सचिव रीना जोशी, एसके सिंह और संयुक्त आयुक्त राजीव मेहरा उपस्थित रहे।
आगे क्या
मुख्यमंत्री ने इस समय अवधि में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने, गश्त बढ़ाने और सड़कों पर रोशनी सुधारने के निर्देश दिए हैं। परिवहन विभाग को भी हाई-रिस्क जोन की पहचान कर वहां नियमित निगरानी बढ़ाने के लिए कहा गया है।






