
देहरादून। उत्तराखंड में प्रस्तावित विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से पहले प्री-एसआईआर की प्रक्रिया जोर-शोर से चल रही है, ताकि आगामी चरण में मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 4 दिसंबर 2025 से शुरू हुई इस प्रक्रिया में बूथ लेवल अधिकारियों द्वारा घर-घर संपर्क और दस्तावेजी तैयारी की जा रही है। हालांकि, एक महीने से अधिक समय बीतने के बावजूद राजनीतिक दलों की ओर से सभी बूथों पर बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) की नियुक्ति पूरी न हो पाने से चुनावी तैयारियों की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
प्री-एसआईआर का उद्देश्य एसआईआर के दौरान मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन बनाने की नींव तैयार करना है। इसके तहत मतदाताओं से संवाद, दस्तावेजों की जानकारी और डिजिटल मैपिंग की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में बीएलओ के साथ राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए की भूमिका अहम मानी जाती है, ताकि सूची की पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनी रहे।
आधिकारिक जानकारी
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर उत्तराखंड में प्री-एसआईआर गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, प्रदेश में कुल 11,733 बूथ हैं, जहां प्रत्येक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल की ओर से बीएलए की नियुक्ति अनिवार्य है। हालांकि अब तक केवल 8,700 बीएलए ही नियुक्त हो पाए हैं, जबकि 3,033 बूथों पर अभी भी बीएलए की कमी बनी हुई है।
प्री-एसआईआर में क्या हो रहा है
प्री-एसआईआर चरण में 2003 की मतदाता सूची में दर्ज ऐसे मतदाताओं, जिनकी उम्र वर्तमान में लगभग 40 वर्ष या उससे अधिक है, उनकी बीएलओ ऐप के माध्यम से सीधे मैपिंग की जा रही है। वहीं जिन मतदाताओं का नाम 2003 की सूची में नहीं है, उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम के आधार पर प्रोजनी के रूप में सत्यापन किया जा रहा है, ताकि भविष्य में नाम काटे या जोड़े जाने की प्रक्रिया में त्रुटि न रहे।
बीएलए नियुक्ति में सुस्ती
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से कई दौर की बैठकों और अनुरोधों के बावजूद राजनीतिक दल सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त नहीं कर पाए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार एक प्रमुख दल की ओर से 5,300 बीएलए, दूसरे प्रमुख दल की ओर से 3,200 बीएलए और अन्य दलों की ओर से लगभग 200 बीएलए नियुक्त किए गए हैं। यह स्थिति तब है, जब प्रदेश में दो प्रमुख दलों के पास कार्यकर्ताओं की बड़ी संख्या मौजूद है।
अधिकारियों का पक्ष
अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को एसआईआर के बारे में जागरूक कर रहे हैं और उनसे अपने दस्तावेज तैयार रखने का आग्रह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम 2003 की मतदाता सूची में नहीं है, उन्हें आवश्यक कागजात एकत्र करने चाहिए, ताकि एसआईआर के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो।
राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया
कांग्रेस की एसआईआर समन्वय एवं निगरानी समिति के सदस्य अमरेंद्र बिष्ट ने कहा कि पार्टी ने सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों में पहले बीएलए-1 नियुक्त कर दिए हैं और अब बीएलए-2 की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने दावा किया कि 15 से 20 जनवरी तक सभी बूथों पर बीएलए नियुक्त कर सूची निर्वाचन कार्यालय को सौंप दी जाएगी।
वहीं भाजपा नेता एवं कोषाध्यक्ष पुनीत मित्तल ने बताया कि पार्टी ने अब तक 5,300 बीएलए नियुक्त कर दिए हैं और शेष की सूची का सत्यापन चल रहा है। जनवरी के अंत तक सभी बूथों पर बीएलए नियुक्ति पूरी कर दी जाएगी।
बीएलए क्यों हैं जरूरी
बीएलए राजनीतिक दलों के अधिकृत प्रतिनिधि होते हैं, जो बीएलओ के साथ मिलकर मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करते हैं। वर्ष 2008 से लागू इस व्यवस्था का उद्देश्य मतदाता सूची में नाम कटने, दोहरी प्रविष्टि और अपात्र नामों जैसी त्रुटियों को रोकना है। एसआईआर के दौरान बीएलए की सक्रिय भूमिका से ही मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक बनाया जा सकता है।
आगे क्या होगा
निर्वाचन आयोग का प्रयास है कि एसआईआर शुरू होने से पहले सभी बूथों पर बीएलए की नियुक्ति पूरी हो जाए। यदि तय समयसीमा तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तो राजनीतिक दलों पर दबाव और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में प्री-एसआईआर की प्रगति और बीएलए नियुक्ति की स्थिति पर सभी की नजर बनी रहेगी।







