
देहरादून — उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताओं के नाम बदले जाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। राज्य सरकार ने खेल महाकुंभ का नाम बदलकर मुख्यमंत्री खेल प्रतियोगिता कर दिया है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली खेल प्रतियोगिताओं को अब स्थानीय विधायक और संसदीय क्षेत्रों की प्रतियोगिताओं को सांसद के नाम से आयोजित किया जाएगा। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस ने कड़ा ऐतराज जताते हुए आरोप लगाया है कि बीजेपी खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के बजाय केवल नाम बदलने की राजनीति कर रही है। इस मुद्दे पर अब प्रदेश में राजनीतिक बहस छिड़ गई है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा की जगह नए ग्रामीण रोजगार कानून ‘विकसित भारत गारंटी (VB-G RAM G) बिल 2025’ लाने की तैयारी के बाद से ही कांग्रेस लगातार नाम बदलने की राजनीति को लेकर बीजेपी पर हमलावर रही है। इसी क्रम में उत्तराखंड में खेल प्रतियोगिताओं के नाम बदले जाने के फैसले को कांग्रेस ने एक नया राजनीतिक मुद्दा बना लिया है।
क्या बदला गया है
राज्य सरकार के फैसले के अनुसार अब तक आयोजित होने वाला खेल महाकुंभ अब मुख्यमंत्री खेल प्रतियोगिता के नाम से जाना जाएगा। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली खेल प्रतियोगिताओं को संबंधित विधायक के नाम से और जिले या संसदीय क्षेत्र स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं को सांसद के नाम से आयोजित किया जाएगा।
कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि बीजेपी खिलाड़ियों की प्रतिभा, सुविधाओं और बुनियादी ढांचे पर ध्यान देने के बजाय प्रतियोगिताओं के नाम बदलने पर ज्यादा जोर दे रही है। कांग्रेस का कहना है कि वर्षों से चले आ रहे खेल महाकुंभ का नाम अचानक बदलने का कोई ठोस कारण नहीं बताया गया है।
प्रदेश कांग्रेस की प्रवक्ता प्रतिभा ने कहा कि नाम बदलने से न तो खिलाड़ियों की प्रतिभा निखरेगी और न ही खेल व्यवस्थाओं में कोई सुधार होगा। उनके अनुसार अब खेल मैदानों के आसपास खिलाड़ियों के बजाय नेताओं के होर्डिंग अधिक नजर आएंगे।
कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस प्रवक्ता प्रतिभा ने कहा कि बीजेपी हमेशा नाम बदलने की राजनीति करती रही है। उनके अनुसार कांग्रेस कार्यकाल में शुरू हुई योजनाओं और आयोजनों के नाम बदलकर बीजेपी उनका श्रेय लेने का प्रयास करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नाम बदलने से खिलाड़ियों को कोई ठोस लाभ नहीं मिलता, तो इसका औचित्य क्या है।
बीजेपी का पक्ष
बीजेपी ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार का फोकस युवाओं और खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने पर है। प्रदेश बीजेपी महामंत्री कुंदन परिहार ने कहा कि सरकार ग्रामीण स्तर तक खेल प्रतिभाओं को खोजने और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिताओं के नाम को लेकर विपक्ष क्या कहता है, इससे सरकार को फर्क नहीं पड़ता।
सरकारी पक्ष से सफाई
विशेष प्रमुख खेल सचिव अमित सिंह ने बताया कि पहले जो खेल महाकुंभ आयोजित होता था, उसे अब मुख्यमंत्री खेल प्रतियोगिता या मुख्यमंत्री ट्रॉफी के नाम से किया जाएगा। इसके तहत राज्य के छोटे और स्थानीय खेलों को भी शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण और जिला स्तर की प्रतियोगिताओं के नामकरण का उद्देश्य आयोजन को और संगठित करना है।
आगे क्या?
खेल प्रतियोगिताओं के नए नामों के साथ आगामी आयोजनों की तैयारियां शुरू की जा रही हैं। वहीं, कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि यदि सरकार ने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया, तो इस मुद्दे को राजनीतिक और जनस्तर पर उठाया जाएगा।







