
देहरादून में भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों के प्रमोशन की तैयारी तेज हो गई है। वन मुख्यालय ने जनवरी 2026 से मिलने वाले पदोन्नति लाभों का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। प्रस्ताव में कंजरवेटर, चीफ कंजरवेटर और कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड के लिए योग्य अधिकारियों के नाम शामिल हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड वन विभाग बीते समय से अधिकारियों की कमी से जूझ रहा है। ऐसे में पदोन्नति प्रक्रिया तेज होने से विभाग में कार्यक्षमता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। कई अधिकारी लंबे समय से प्रमोशन योग्यता पूरी कर चुके थे, जिनकी फाइलें अलग-अलग कारणों से लंबित थीं।
आधिकारिक जानकारी
वन मुख्यालय ने शासन को जनवरी 2026 से लागू होने वाले प्रमोशन लाभों के लिए अंतिम सूची भेज दी है। इस सूची में कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (JAG) से लेकर कंजरवेटर और चीफ कंजरवेटर रैंक तक कुल 9 IFS अधिकारी शामिल हैं। अधिकारी इस पर टिप्पणी करने से बचते दिखे, लेकिन विभागीय सूत्रों ने प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि की।
कनिष्ठ प्रशासनिक ग्रेड (JAG) प्रमोशन
कुल 6 अधिकारी जनवरी 2026 में JAG के लिए अपनी आवश्यक सेवा अवधि पूरी कर रहे हैं।
इनमें शामिल हैं:
- डीएफओ सुबोध काला — 2025 में ही योग्यता पूरी कर चुके थे, लेकिन विभागीय जांच लंबित रहने से प्रमोशन नहीं मिल पाया। इस बार भी उनका मामला जांच परिणाम पर निर्भर रहेगा।
- 2017 बैच के अधिकारी — महातिम यादव, कुंदन कुमार, दीपक सिंह, आशुतोष सिंह और पुनीत तोमर। ये पांचों अधिकारी नौ साल की सेवा अवधि पूरी कर जनवरी 2026 से JAG प्रमोशन के योग्य हो जाएंगे।
डीएफओ से कंजरवेटर प्रमोशन
2012 बैच के दो अधिकारी — चंद्रशेखर जोशी और कल्याणी — अगले वर्ष 14 साल की सेवा अवधि पूरी करेंगे। दोनों वर्तमान में प्रभारी कंजरवेटर की भूमिका में हैं और योग्यता पूरी होने पर पूर्ण कंजरवेटर बनाए जा सकते हैं।
कंजरवेटर से चीफ कंजरवेटर प्रमोशन
प्रस्तावित सूची में दो वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं:
- साकेत बडोला, निदेशक — कॉर्बेट टाइगर रिजर्व, 2008 बैच
- टीआर बीजू लाल, 2004 बैच – बीजू लाल का प्रमोशन पहले जांच लंबित रहने के कारण अटका था, लेकिन अब क्लीन चिट मिलने के बाद वे पूर्ण रूप से चीफ कंजरवेटर बनने के योग्य हो चुके हैं।
स्थानीय प्रतिक्रिया
वन विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि प्रमोशन प्रक्रिया आगे बढ़ने से विभागीय कार्य गति पकड़ेंगे और क्षेत्रीय टीमों को बेहतर नेतृत्व मिलेगा। कई वर्षों से पदोन्नति न मिलने के कारण अफसरों में असंतोष था, जो अब कम होने की उम्मीद है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि समय पर पदोन्नति मिलने से अधिकारियों में प्रेरणा बढ़ती है और फील्ड स्तर पर संरक्षण कार्य अधिक प्रभावी ढंग से लागू होते हैं।
आगे क्या?
शासन से अंतिम अनुमति मिलने के बाद जनवरी 2026 से प्रमोशन आदेश जारी किए जाएंगे। उम्मीद है कि नए साल की शुरुआत तक विभागीय पद संरचना में बड़ा बदलाव दिखाई देगा।






