
देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में आज भी मरीजों को समुचित इलाज न मिल पाना और बार-बार हायर सेंटर रेफर किए जाने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। हाल ही में राज्य सरकार ने स्वास्थ्य सचिव की जिम्मेदारी सचिन कुर्वे को सौंपी है। ऐसे में प्रदेश की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच स्वास्थ्य सेवाओं को दुरुस्त करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। स्वास्थ्य सचिव ने अब अपनी प्राथमिकताओं और आगे की रणनीति को स्पष्ट किया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड सीमित राजस्व संसाधनों वाला पर्वतीय राज्य है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना यहां हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। सरकार द्वारा डॉक्टरों की नियुक्ति, मेडिकल कॉलेजों का विस्तार और उपकरणों की उपलब्धता बढ़ाने के बावजूद कई क्षेत्रों में मरीजों को इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।
पर्वतीय क्षेत्रों में इलाज अब भी चुनौती
प्रदेश के कई पर्वतीय इलाकों में आज भी मरीजों को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिल पाता। कई मामलों में लोग कई किलोमीटर पैदल चलकर नजदीकी अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन वहां भी संसाधनों की कमी के चलते मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। नतीजतन, कई बार मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
स्वास्थ्य सचिव की प्राथमिकताएं
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने बताया कि उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता पूर्व अधिकारियों द्वारा किए गए सकारात्मक कार्यों को आगे बढ़ाना है। इसके साथ ही पर्वतीय क्षेत्रों में सुलभ और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। इसके लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठकों में प्राथमिकताएं तय की गई हैं।
टेक्नोलॉजी और डायग्नोस्टिक पर जोर
सचिन कुर्वे ने कहा कि उपचार से लेकर डायग्नोस्टिक जांच तक टेक्नोलॉजी का बेहतर उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य यह है कि मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही जांच और इलाज की सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि अगले एक सप्ताह के भीतर इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाएंगे।
मैनपावर की कमी पर फोकस
स्वास्थ्य सचिव के अनुसार, डायरेक्टर हेल्थ एजुकेशन और डीजी हेल्थ से मैनपावर की स्थिति को लेकर जानकारी प्राप्त की गई है। जिन मेडिकल कॉलेजों, सीएचसी और पीएचसी में पर्याप्त स्टाफ है, वहां संसाधनों के बेहतर उपयोग पर ध्यान दिया जाएगा। वहीं जहां मैनपावर की कमी है, वहां जल्द प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा जाएगा, ताकि स्थानीय लोग स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहें।
रेफरल सिस्टम सुधारने की तैयारी
सीमांत क्षेत्रों में कई अस्पताल केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। इस पर स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि ऐसे अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक की जा चुकी है। जल्द ही विस्तृत समीक्षा कर ठोस निर्णय लिए जाएंगे।
अस्पतालों को इंटीग्रेटेड मॉडल से जोड़ने की योजना
स्वास्थ्य सचिव ने बताया कि जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और डिस्पेंसरी को इंटीग्रेटेड और क्लस्टर आधारित मॉडल पर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। इससे मरीजों को समय पर जांच और इलाज की सुविधा मिल सकेगी। इस संबंध में डीजी हेल्थ और निदेशक स्वास्थ्य शिक्षा को निर्देश दिए गए हैं।
चारधाम यात्रा और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं
हर साल चारधाम यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंचते हैं। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि रजिस्ट्रेशन और हेल्थ प्रोफाइल के माध्यम से श्रद्धालुओं की बेहतर निगरानी और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने पर काम किया जाएगा। हेली एंबुलेंस और अन्य तकनीकी संसाधनों के बेहतर उपयोग पर भी विचार किया जा रहा है।
आगे क्या होगा
स्वास्थ्य विभाग अगले सप्ताह विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक कर प्राथमिकताओं को अंतिम रूप देगा। इसके बाद शासन को प्रस्ताव भेजकर चरणबद्ध तरीके से स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।






