
थराली (चमोली): रविवार दोपहर उत्तराखंड में एक बार फिर धरती डोल उठी। थराली और बागेश्वर की सीमा से लगे क्षेत्रों में दोपहर 2:42 बजे भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। अचानक कंपन महसूस होते ही लोग घरों से बाहर निकल आए। राहत की बात यह रही कि किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लोगों में दहशत का माहौल बना रहा।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में आता है। हाल के वर्षों में राज्य में कई बार धरती हिल चुकी है। थराली क्षेत्र पहले भी आपदा की मार झेल चुका है, ऐसे में भूकंप के झटकों ने लोगों में पुराने भय को फिर जगा दिया है।
भूकंप का केंद्र और तीव्रता
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, रविवार 9 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 40 मिनट 4 सेकंड पर भूकंप आया जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 3.6 मापी गई। भूकंप का केंद्र बिंदु बागेश्वर जिले में था और इसकी गहराई लगभग 10 किलोमीटर थी। झटके थराली, ग्वालदम और आसपास के क्षेत्रों में महसूस किए गए।
स्थानीय प्रतिक्रिया
भूकंप का झटका महसूस होते ही लोग अपने घरों से निकलकर खुले स्थानों में आ गए। कई परिवारों ने कुछ देर तक बाहर ही समय बिताया। स्थानीय निवासी शशिकांत ने बताया, “भूकंप का झटका अचानक आया, घर की दीवारें और दरवाजे कुछ सेकंड तक हिलते रहे।”
प्रशासन की जानकारी
चमोली जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदकिशोर जोशी ने बताया, “भूकंप का केंद्र बागेश्वर जिले में था। ग्वालदम क्षेत्र में इसका झटका ज्यादा तेज महसूस किया गया। हालांकि, किसी प्रकार के नुकसान की सूचना नहीं है।”
भूकंप के वैज्ञानिक कारण
वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान, देहरादून के भूवैज्ञानिक डॉ. नरेश कुमार के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में इंडियन प्लेट और यूरेशियन प्लेट के बीच लगातार घर्षण हो रहा है।
उन्होंने बताया, “इंडियन प्लेट उत्तर दिशा में और यूरेशियन प्लेट दक्षिण दिशा में जा रही है। दोनों प्लेटों के टकराव से उत्पन्न ऊर्जा जब धरती के अंदर मौजूद चट्टानों पर दबाव डालती है और वे टूट जाती हैं, तब यह ऊर्जा झटके के रूप में बाहर निकलती है। यही भूकंप का कारण बनती है।”
क्यों संवेदनशील है उत्तराखंड
उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन 4 और जोन 5 में आता है, जो उच्च जोखिम वाले क्षेत्र माने जाते हैं। इसी कारण यहां समय-समय पर हल्के और मध्यम स्तर के भूकंप आते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य में भूकंप सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक रहना आवश्यक है।
आगे क्या होगा
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं कि प्रभावित क्षेत्रों से रिपोर्ट प्राप्त की जाए और किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जाए।






