
देहरादून: संसदीय स्थायी समिति द्वारा आपदा प्रबंधन विषय पर राष्ट्रीय परीक्षण के तहत 26 नवंबर 2025 को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के प्रतिनिधि शामिल होंगे। पर्वतीय और आपदा-संवेदनशील राज्यों की तैयारी, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति को समझने के उद्देश्य से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
भारत के पर्वतीय और तटीय राज्य जलवायु परिवर्तन, भौगोलिक जोखिम और प्राकृतिक आपदाओं की पुनरावृत्ति के कारण लगातार चुनौती का सामना कर रहे हैं। ऐसे में संसदीय स्थायी समिति की यह बैठक राज्यों की क्षमता, जरूरतों और आपदा प्रबंधन से जुड़े नवाचारों की व्यापक समीक्षा के लिए आयोजित की जा रही है।
अधिकारिक जानकारी
उत्तराखंड से वरिष्ठ अधिकारियों का दल इस बैठक में राज्य का पक्ष विस्तृत रूप से प्रस्तुत करने के लिए तैयार है।
तैयार किए गए दस्तावेजों में निम्न विषय शामिल हैं:
- राज्य में अब तक किए गए तकनीकी और संरचनात्मक प्रयास
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण की दिशा में अपनाए गए नवाचारी मॉडल
- पर्वतीय राज्य होने के नाते विशिष्ट भौगोलिक चुनौतियां
- भविष्य में आवश्यक संसाधन, तकनीक और सहयोग
उत्तराखंड की प्रस्तुति में वनाग्नि नियंत्रण, बादल फटना, लैंडस्लाइड, एवलांच, फ्लैश फ्लड और भूकंप जैसी आपदाओं पर विस्तृत जानकारी दी जाएगी। प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) समीर सिन्हा ने बताया कि पिछले वर्षों में वनाग्नि नियंत्रण को लेकर किए गए प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। वनाग्नि रोकथाम में तकनीकी हस्तक्षेप, जोखिम वाले क्षेत्रों की मैपिंग और सामुदायिक भागीदारी प्रमुख बिंदु होंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड के पहाड़ी जनपदों में लैंडस्लाइड, एवलांच और बादल फटने की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसलिए इस बैठक में इन चुनौतियों को स्पष्ट रूप से रखना अत्यंत आवश्यक है।
कुछ निवासियों का कहना है कि SDRF और जिला स्तर पर इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को मजबूत करना पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जीवनरक्षक कदम साबित हो सकता है।
विशेषज्ञ टिप्पणी
वरिष्ठ पत्रकार भगीरथ शर्मा का कहना है कि यह बैठक उत्तराखंड के लिए बड़े अवसर की तरह है। “यदि राज्य अपनी समस्याओं और जरूरतों को मजबूती से समिति के सामने रखता है, तो भविष्य में केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता और सहयोग बढ़ने की पूरी संभावना है।”
डेटा / आंकड़े
- बैठक तिथि: 26–27 नवंबर 2025
- उत्तराखंड प्रस्तुति विषय: वनाग्नि, भूकंप, फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड, एवलांच
- दक्षिण भारत के राज्यों की बैठक: 27 नवंबर
- फोकस: आपदा जोखिम न्यूनीकरण, मॉनिटरिंग सिस्टम, तकनीकी हस्तक्षेप
आगे क्या?
समिति के समक्ष प्रस्तुति के बाद राज्य की जरूरतों, संसाधनों और केंद्र से अपेक्षित सहयोग पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। बैठक से मिले सुझावों के आधार पर पर्वतीय राज्यों के लिए नई नीतियां और आपदा प्रबंधन रणनीतियां तैयार की जा सकती हैं। उत्तराखंड द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज आगामी वर्षों में केंद्र–राज्य सहयोग मॉडल को नई दिशा दे सकता है।







