
देहरादून: उत्तराखंड में लंबित 27 सूत्री मांगों पर अब तक अमल न होने से नाराज उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने चरणबद्ध आंदोलन का एलान कर दिया है। महासंघ के अनुसार 18 फरवरी से आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसके तहत पहले चरण में सभी जिला मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद 23 फरवरी को महासंघ द्वारा सचिवालय कूच किया जाएगा। महासंघ ने सरकार पर विकास कार्यों से जुड़े कर्मचारियों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
डिप्लोमा इंजीनियर्स उत्तराखंड में सड़कों, भवनों, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी विकास कार्यों से सीधे जुड़े हुए हैं। लंबे समय से वे अपनी विभिन्न सेवा संबंधी और कार्यस्थल से जुड़ी मांगों को लेकर सरकार के समक्ष ज्ञापन और वार्ता करते आ रहे हैं, लेकिन समाधान न निकलने से असंतोष बढ़ता जा रहा है।
आंदोलन की रूपरेखा
महासंघ के अनुसार आंदोलन चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। 18 फरवरी को सभी जिला मुख्यालयों में धरना प्रदर्शन होगा। इसके बाद 23 फरवरी को देहरादून में सचिवालय कूच कर सरकार का ध्यान मांगों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
बैठकों का कार्यक्रम
महासंघ के प्रांतीय महासचिव वीरेंद्र सिंह गुंसाई ने बताया कि महासंघ की उच्चाधिकारी संघ की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। आंदोलन से पहले संगठनात्मक मजबूती के लिए 2 फरवरी को सभी जिलों में शाखा मुख्यालयों पर महासंघ की बैठक होगी, जबकि 10 फरवरी को सभी जिला मुख्यालयों में बैठकें आयोजित की जाएंगी।
विषम परिस्थितियों में कार्य का दावा
महासंघ का कहना है कि उसके अधिकांश सदस्य दुर्गम और विषम भौगोलिक परिस्थितियों में कार्य करते हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं और मांगों की अनदेखी की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
कर्मचारी संगठनों से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं की, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। वहीं आम लोगों को आशंका है कि आंदोलन से विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
आगे क्या होगा
महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि पहले चरण के आंदोलन के बाद भी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तो आगे के चरणों में आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।




