
देहरादून: उत्तराखंड में लंबे समय से वन क्षेत्राधिकारियों की कमी से जूझ रहे वन विभाग को जल्द राहत मिल सकती है। शासन की मंजूरी मिलते ही प्रदेश के उपवन क्षेत्राधिकारियों यानी डिप्टी रेंजर्स को क्षेत्रीय रेंज का प्रभार सौंपा जा सकता है। वन मुख्यालय ने इस संबंध में शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। यदि इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति मिल जाती है, तो प्रदेश की कई ऐसी रेंजों में प्रशासनिक और संरक्षण संबंधी कामकाज पटरी पर लौट सकता है, जो फिलहाल डबल चार्ज या बिना नियमित रेंजर के संचालित हो रही हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड वन विभाग में रेंजर को रेंज स्तर पर सबसे अहम कड़ी माना जाता है। वनों का संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा, अवैध कटान और शिकार पर नियंत्रण के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियां रेंजर के अधीन होती हैं। इसके बावजूद वर्षों से इस पद पर भारी कमी बनी हुई है, जिससे फील्ड स्तर पर व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं।
प्रदेश में रेंजरों की भारी कमी
प्रदेश में वन क्षेत्राधिकारियों के कुल 308 पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 180 रेंजर ही फील्ड में कार्यरत हैं। करीब 128 पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। इसका नतीजा यह है कि कई रेंजों को डबल चार्ज पर चलाया जा रहा है, जबकि कुछ रेंजों में नियमित रेंजर की तैनाती ही नहीं हो पा रही है।
डबल चार्ज से बढ़ा काम का बोझ
डबल चार्ज की व्यवस्था के चलते एक ही रेंजर को दो-दो रेंजों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। इससे न सिर्फ कार्यभार बढ़ रहा है, बल्कि निगरानी, वन संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन की प्रभावशीलता भी प्रभावित हो रही है। जिन रेंजों में रेंजर तैनात नहीं हैं, वहां वन अपराधों पर नियंत्रण और प्रशासनिक कार्यों में लगातार दिक्कतें सामने आ रही हैं।
उपवन क्षेत्राधिकारियों को प्रभार देने पर विचार
वन विभाग ने इस समस्या के समाधान के लिए एक बार फिर पहल की है। रेंजरों की कमी को देखते हुए उपवन क्षेत्राधिकारियों को रेंज का प्रभार देने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। यह प्रस्ताव रंजन कुमार मिश्रा, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ) की ओर से भेजा गया है। विभाग का मानना है कि इससे फील्ड स्तर पर कामकाज में सुधार आएगा।
प्रशिक्षण के कारण बढ़ी चुनौती
वन विभाग के अनुसार हाल ही में सीधी भर्ती से नियुक्त 32 वन क्षेत्राधिकारी फिलहाल छह महीने के प्रशिक्षण पर हैं। प्रशिक्षण अवधि के चलते इनका फील्ड में उपयोग नहीं हो पा रहा है, जिससे मौजूदा कमी और अधिक महसूस की जा रही है।
डबल चार्ज पर चल रही प्रमुख रेंज
रेंजरों की कमी के चलते जिन प्रमुख रेंजों में डबल चार्ज की स्थिति बनी हुई है, उनमें शामिल हैं:
रसियाबड़ यूनिट, तिमली, पूर्वी पिंडर, पौड़ी रेंज नागदेव, गुप्तकाशी, खाकरा, सांड्रा, पुरोला, देवलसारी, वन्यजीव विहार विनोग, देवधार, मुगलसंती, ढिकाला, कालागढ़ समेत कई अन्य रेंज।
आधिकारिक बयान
प्रमुख वन संरक्षक हॉफ रंजन कुमार मिश्रा ने बताया कि रेंजर वन विभाग का सबसे जिम्मेदारी वाला पद है और रेंज स्तर पर सभी गतिविधियों की कमान उन्हीं के हाथ में होती है। रेंजरों की कमी को देखते हुए योग्य उपवन क्षेत्राधिकारियों को रेंज का प्रभार देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है और उम्मीद है कि शासन इस पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।
आगे क्या होगा
यदि शासन से इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है, तो डिप्टी रेंजर्स को जिम्मेदारी मिलने से कई खाली रेंजों में कामकाज सुचारु हो सकेगा। इससे वन संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।




