
देहरादून में डिजिटल लेनदेन, इंटरनेट मीडिया और ऑनलाइन सेवाओं के बढ़ते उपयोग के बीच साइबर ठगी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, लेकिन वर्ष 2025 में इसके मामलों में अपेक्षाकृत कमी दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संदेशों, जागरूकता अभियानों और लोगों की बढ़ती सतर्कता का सकारात्मक असर देखने को मिला है। समय रहते टोल फ्री नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने से बड़ी रकम को होल्ड कराया जा सका, जिससे कई पीड़ितों को आर्थिक नुकसान से बचाया गया। यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि बीते वर्षों में साइबर ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ी थीं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
पिछले कुछ वर्षों में उत्तराखंड समेत देशभर में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा था। फर्जी कॉल, ऑनलाइन निवेश, डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों ने आम लोगों को निशाना बनाया। हालांकि 2025 में लगातार चलाए गए जागरूकता अभियानों और त्वरित रिपोर्टिंग के कारण साइबर ठगी के मामलों में कमी आई है, लेकिन पूरी तरह से नियंत्रण अब भी एक चुनौती बना हुआ है।
आधिकारिक जानकारी
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में साइबर ठगी से जुड़ी कुल 24,442 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें ठगों ने करीब 117 करोड़ रुपये की ठगी की। वहीं, समय पर शिकायत दर्ज होने से 27.2 करोड़ रुपये की राशि को होल्ड कराकर बचाया गया।
तुलना करें तो वर्ष 2024 में 25,000 शिकायतों में 220 करोड़ रुपये की साइबर ठगी हुई थी, जबकि वर्ष 2023 में 21,000 शिकायतों में 55 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई थी।
डिजिटल अरेस्ट मामलों की स्थिति
वर्ष 2024 में साइबर ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का नया तरीका अपनाया था, जिसमें खुद को पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराया गया। कोरियर में संदिग्ध वस्तु, फर्जी पासपोर्ट या ड्रग्स का हवाला देकर खातों की जांच के नाम पर लाखों से करोड़ों रुपये ठगे गए।
हालांकि वर्ष 2025 में डिजिटल अरेस्ट के मामले घटकर केवल 8 रह गए, जिसे जागरूकता का बड़ा असर माना जा रहा है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
स्थानीय लोगों का कहना है कि अब लोग पहले की तुलना में ज्यादा सतर्क हो गए हैं और संदिग्ध कॉल या लिंक मिलने पर तुरंत पुलिस से संपर्क कर रहे हैं।
कुछ पीड़ितों ने बताया कि 1930 नंबर पर समय रहते कॉल करने से उनकी मेहनत की कमाई बच पाई।
संख्यात्मक विवरण
साइबर ठगी के आंकड़े (उत्तराखंड):
- वर्ष 2025: 24,442 शिकायतें, 117 करोड़ रुपये की ठगी, 27.2 करोड़ रुपये होल्ड
- वर्ष 2024: 25,000 शिकायतें, 220 करोड़ रुपये की ठगी
- वर्ष 2023: 21,000 शिकायतें, 55 करोड़ रुपये की ठगी
आंकड़ों के अनुसार ठगी की लगभग 80 प्रतिशत धनराशि चीन, पाकिस्तान, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों तक पहुंच गई।
आगे की चुनौतियां
पुलिस के अनुसार साइबर ठग जरूरतमंदों को लालच देकर उनके नाम पर सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाते हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया जाता है। विदेशों में बैठे मास्टरमाइंड तक पहुंचना, सीमित संसाधन और मानवशक्ति की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। बड़ी ठगी के मामलों में रकम को कुछ ही घंटों में कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिससे जांच और कठिन हो जाती है।
आगे क्या होगा
बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए देहरादून में प्रदेश का पहला साइबर एक्सीलेंस सेंटर खोलने की योजना है, जहां पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा और साइबर अपराध पर शोध होगा। इसके साथ ही उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुए 2000 सिपाही वर्ष 2026 में प्रशिक्षण के बाद ड्यूटी संभालेंगे। साइबर मामलों के लिए कांट्रेक्ट पर साइबर एक्सपर्ट की नियुक्ति भी की जा रही है।
विशेषज्ञ की राय
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर का कहना है कि जागरूकता से ही साइबर ठगी के मामलों में कमी लाई जा सकती है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि ऑनलाइन निवेश या किसी भी डिजिटल लेनदेन से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें, ताकि जीवन भर की कमाई जोखिम में न पड़े।






