
देहरादून/दिल्ली: कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा की अध्यक्षता में मंगलवार को दिल्ली में उत्तराखंड कांग्रेस नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में संगठन की मजबूती, राज्य की ज्वलंत समस्याओं और आगामी रैलियों की तैयारियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए उत्तराखंड कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और राज्य के मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाने की कोशिश में है। हाल के दिनों में पार्टी कई मामलों को लेकर सरकार पर निशाना साध रही है, लेकिन वरिष्ठ नेता हरक सिंह रावत की विवादित टिप्पणी से पार्टी के अभियान पर असहजता भी बढ़ी है। ऐसे माहौल में दिल्ली में हुई यह बैठक खास महत्व रखती है।
आधिकारिक जानकारी
दिल्ली में हुई बैठक में कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा, सह प्रभारी सुरेंद्र शर्मा और मनोज यादव, प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्या, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और CWC सदस्य करन माहरा, पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत समेत वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
बैठक में संगठन विस्तार, बूथ स्तर तक मजबूती और राज्य की जनता से जुड़े मुद्दों पर आगामी रणनीति तैयार की गई। शैलजा ने 14 दिसंबर को दिल्ली में होने वाली ‘वोट चोर गद्दी छोड़’ रैली को सफल बनाने के लिए बड़े स्तर पर तैयारी करने पर जोर दिया।
राजेंद्र भंडारी, महामंत्री संगठन, ने बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली की रैली कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण है, जिसमें देशभर से लाखों लोगों के जुटने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में पर्यावरण संबंधी पाबंदियों के कारण रैली में शामिल होने वाले वाहनों के लिए विशेष निर्देश दिए गए हैं—बीएस6 से नीचे के वाहन और डीजल वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं कर पाएंगे।
स्थानीय प्रतिक्रिया
प्रदेश से जुड़े कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मानना है कि दिल्ली रैली पार्टी को नया जोश दे सकती है। एक कार्यकर्ता ने कहा, “पार्टी लगातार राज्य के मुद्दे उठा रही है। उम्मीद है कि रैली से जनता में सही संदेश जाएगा।”
कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी स्वीकार किया कि हालिया विवादों ने पार्टी की गति को थोड़ी देर के लिए प्रभावित किया है, लेकिन अब संगठन नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने को तैयार है।
आंतरिक चुनौती: हरक सिंह का विवाद
पार्टी के भीतर हाल ही में हरक सिंह रावत द्वारा सिख समुदाय पर की गई विवादित टिप्पणी ने कांग्रेस को डैमेज कंट्रोल में डाल दिया था।
धराली घटना को बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाने की कांग्रेस की योजना उसी विवाद के चलते कमजोर पड़ी।
हरक सिंह को गुरुद्वारा जाकर माफी मांगनी पड़ी, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी जूता सेवा कर प्रायश्चित किया।
नेताओं का मानना है कि इस विवाद ने पार्टी की रणनीति को प्रभावित किया, लेकिन दिल्ली बैठक में इसे पार करने और नई शुरुआत पर जोर दिया गया।
आगे क्या?
रैली में उत्तराखंड से बड़े पैमाने पर कार्यकर्ताओं को लाने के लिए प्रभारियों को जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। मीटिंग पॉइंट, यात्रा मार्ग और समन्वय से जुड़ी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। संगठनात्मक स्तर पर भी कई नए बदलावों पर अगले सप्ताह निर्णय लिया जा सकता है।





