
देहरादून: बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं एक बार फिर तेज हो गई हैं। भाजपा नेतृत्व पहले ही संकेत दे चुका था कि बिहार चुनावों के बाद राज्य में कैबिनेट विस्तार की संभावना प्रबल है। वहीं विधायकों की मुख्यमंत्री से मुलाकातों के बढ़ते दौर ने राजनीतिक हलचल को और तेज कर दिया है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड में वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों के बाद से ही मंत्रिमंडल के कई पद रिक्त हैं। समय-समय पर इन पदों को भरने की चर्चा होती रही है, लेकिन अब तक विस्तार पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया। वर्तमान सरकार अपना कार्यकाल लगभग चार वर्ष पूरा करने जा रही है, ऐसे में आगामी 2027 के चुनाव से पहले मंत्रिमंडल विस्तार को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अधिकारिक जानकारी
भाजपा प्रदेश नेतृत्व पहले भी कह चुका है कि बिहार चुनावों के नतीजों के बाद उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार पर विचार किया जा सकता है। बिहार चुनाव संपन्न होने और नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण की तैयारियों के बाद अब राज्य में इसी मुद्दे पर चर्चाएं फिर से जोर पकड़ने लगी हैं।
अधिकारियों ने इस पर औपचारिक टिप्पणी करने से फिलहाल परहेज किया है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
राजनीतिक हलकों में ऐसा माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री धामी से विधायकों की बढ़ती मुलाकातें इस संभावना को और मजबूत कर रही हैं। देहरादून में भी पार्टी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज है।
राजनीतिक बयान
बीजेपी पक्ष
भाजपा के वरिष्ठ विधायक विनोद चमोली ने कहा, “जब बीजेपी नेतृत्व उचित समझेगा, तब इस काम को आगे बढ़ाएगा। मंत्रिमंडल विस्तार की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन यह भी सही है कि वर्तमान कैबिनेट ने कई बड़े निर्णय लिए हैं और कामकाज प्रभावित नहीं हुआ है।”
उन्होंने यह भी कहा कि “जितने ज्यादा हाथ होंगे, उतना अधिक काम आगे बढ़ेगा।”
कांग्रेस पक्ष
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “मंत्रिमंडल विस्तार अभी तक क्यों नहीं हुआ? इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना चाहिए। पांच पद खाली होने के बावजूद विस्तार न होना सरकार की गंभीरता पर सवाल उठाता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि “मुख्यमंत्री सभी विभाग अपने पास रखना चाहते हैं, जिससे मनमानी बढ़ रही है।”
डेटा / संख्या
– धामी मंत्रिमंडल में 5 पद वर्तमान में रिक्त
– इनमें से 3 पद 2022 से, 1 पद 2023 (कैबिनेट मंत्री चंदन रामदास का निधन), और 1 पद 2025 (प्रेमचंद अग्रवाल का इस्तीफा) के कारण खाली हैं।
आगे क्या
राजनीतिक संकेतों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व जल्द ही निर्णय ले सकता है। दिल्ली में पार्टी नेतृत्व के साथ बैठकों और मुख्यमंत्री से विधायकों की मुलाकात के बाद अटकलें और तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी महीनों में मंत्रिमंडल विस्तार संभव है, जो संगठनात्मक संतुलन और चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकता है।






