
देहरादून: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भालू के हमलों का सिलसिला थम नहीं रहा। 27 अक्तूबर से अब तक तीन लोगों की मौत भालू के हमलों या उनसे बचने की कोशिशों में हो चुकी है। लगातार हो रही इन घटनाओं से लोगों में दहशत का माहौल है। सर्दी के मौसम में जब भालू हाइबरनेशन से पहले भोजन एकत्र करने निकलते हैं, तो ऐसी घटनाएं बढ़ जाती हैं। वन मुख्यालय ने इस पर सभी जिलों के अधिकारियों को सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए हैं।
भालू हमलों से दहशत में ग्रामीण क्षेत्र
पिछले दो सप्ताह से कुमाऊं और गढ़वाल मंडल के कई इलाकों से भालू हमले की घटनाएं सामने आ रही हैं। इनमें अब तक तीन लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना है। स्थानीय लोगों ने कहा कि शाम और सुबह के समय भालू घरों के आसपास और खेतों में दिखाई देने लगे हैं, जिससे ग्रामीणों में भय का माहौल है।
संवेदनशील जिले घोषित
वन विभाग के अनुसार राज्य के कई जिले संवेदनशील घोषित किए गए हैं। इनमें — रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली (गोपेश्वर गोविंद वन्यजीव विहार), पिथौरागढ़ और बागेश्वर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में भालू की बढ़ती गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। विभाग ने आवश्यकतानुसार टीमें और पिंजरे भी तैनात किए हैं ताकि जनहानि रोकी जा सके।
वन विभाग की चेतावनी और दिशा-निर्देश
अपर प्रमुख वन संरक्षक विवेक पांडे ने कहा कि यह समय भालू के हाइबरनेशन में जाने का होता है। भालू भोजन की तलाश में अधिक सक्रिय रहते हैं, जिससे मनुष्यों से टकराव की घटनाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने सभी अधिकारियों को तत्काल सतर्कता और निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियाँ (वन विभाग के सुझाव)
- जंगल में अकेले न जाएं, समूह में ही जाएं।
- बहुत सुबह या देर शाम जंगल की ओर जाने से बचें।
- जंगल में चलते समय बातचीत या शोर करते रहें, ताकि जानवर सतर्क रहें।
- घर के पास की झाड़ियों को साफ रखें।
- शाम के समय घर के आसपास पर्याप्त प्रकाश रखें।
- कूड़े-कचरे का निस्तारण सही ढंग से करें, घर के पास न फेंकें क्योंकि इससे भालू आकर्षित होते हैं।
हाल की घटनाएँ (27 अक्तूबर से 6 नवंबर तक)
27 अक्तूबर – उत्तरकाशी जिले के औंगी गांव में भालू के हमले से बचने के प्रयास में महिला की पहाड़ी से गिरकर मौत।
2 नवंबर – जोशीमठ विकासखंड के दाडिम गांव में भालू के हमले में एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल।
3 नवंबर – पिथौरागढ़ जिले के बोरागांव में भालू के हमले में महिला की मौत।
6 नवंबर – उत्तरकाशी के हीना गांव में भालू से बचने की कोशिश में महिला गिरकर जान गंवा बैठी।
इन घटनाओं के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा और भय दोनों है। ग्रामीणों ने वन विभाग से रात्रि गश्त और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
पहली बार भालू को मारने का आदेश
आमतौर पर आदमखोर बाघ या तेंदुए के लिए ही वन विभाग मारने की अनुमति देता है, लेकिन सितंबर में पौड़ी जिले में भालू के लगातार हमलों को देखते हुए पहली बार भालू को मारने का आदेश जारी किया गया था। हालांकि वन अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही उठाया जाता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
रुद्रप्रयाग निवासी किशोर नेगी ने कहा, “अब गांवों के आसपास शाम के समय निकलना मुश्किल हो गया है। बच्चों और बुजुर्गों को बाहर न जाने की सलाह दी गई है।”
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से त्वरित निगरानी और ड्रोन सर्वे की भी मांग की है।
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