
देहरादून: उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय की सुस्ती ने बीएएमएस के सैकड़ों छात्रों की परेशानी बढ़ा दी है। 2022 बैच की प्रथम वर्ष परीक्षा का परिणाम लगभग एक साल बाद जारी किया गया, जिससे कई छात्र अब द्वितीय वर्ष की पढ़ाई पूरी करने के बाद फेल या डिटेन घोषित कर दिए गए हैं। इस देरी से छात्र आक्रोशित हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (UAU) राज्य का प्रमुख संस्थान है, जो बीएएमएस, बीएचएमएस, बीयूएमएस सहित कई आयुर्वेदिक पाठ्यक्रम संचालित करता है।
बीएएमएस कोर्स संरचना के अनुसार —
- हर डेढ़ वर्ष में फाइनल परीक्षा,
- हर छह माह में टर्मिनल परीक्षा,
- और हर दो माह में पीरियॉडिक असेसमेंट आयोजित किया जाता है।
लेकिन 2022 बैच की प्रथम वर्ष परीक्षा का परिणाम लगभग एक साल तक लंबित रहा, जबकि छात्र द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेकर आगे की पढ़ाई कर चुके हैं।
छात्रों का आक्रोश
छात्रों ने बताया कि परिणाम आने में इतनी देरी से उनका शैक्षणिक क्रम पूरी तरह बाधित हो गया है। कुछ छात्रों को फेल या डिटेन कर दिया गया है, जिससे उन्हें अब यह चिंता सता रही है कि वे आगे की परीक्षा में शामिल हो पाएंगे या नहीं।
एक छात्रा नेहा पैन्यूली ने कहा, “हम दूसरे वर्ष की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं, लेकिन अब हमें पहले वर्ष में फेल दिखाया गया है। यह हमारे करियर के साथ मजाक है।”
शैक्षणिक विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही से छात्रों के भविष्य पर गहरा असर पड़ सकता है।
शैक्षणिक सलाहकार डॉ. विवेक उनियाल ने कहा, “यदि विश्वविद्यालय परिणाम जारी करने में इतनी देरी करेगा तो छात्रों का मनोबल टूटेगा। इस नुकसान की भरपाई के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए।”
विश्वविद्यालय प्रशासन की सफाई
वहीं, विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक डा. ओ.पी. सिंह ने कहा कि —
“2022 बैच का परिणाम जारी कर दिया गया है। शेष परिणाम सोमवार के बाद जारी किए जाएंगे। जिन छात्रों को फेल घोषित किया गया है, उनकी बैक परीक्षा दिसंबर में आयोजित की जाएगी। किसी छात्र को नुकसान नहीं होगा।”
शासन से हस्तक्षेप की मांग
छात्रों ने अब सीधे शासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले महीनों में उनकी द्वितीय वर्ष की व्यावसायिक परीक्षा पर भी इसका असर पड़ेगा।
स्थानीय दृष्टिकोण
देहरादून के एक आयुर्वेद कॉलेज के प्रोफेसर प्रदीप जोशी का कहना है, “यह समस्या अकेले इस बैच की नहीं है, बल्कि मूल्यांकन प्रणाली में सुधार की जरूरत है। विवि को तकनीकी संसाधनों का उपयोग कर पारदर्शी और समयबद्ध प्रक्रिया अपनानी चाहिए।”
आगे की दिशा
फिलहाल विश्वविद्यालय ने कहा है कि दिसंबर में बैक परीक्षा आयोजित की जाएगी और अन्य लंबित परिणाम भी जल्द घोषित होंगे।
छात्र उम्मीद कर रहे हैं कि शासन इस पूरे मामले की समीक्षा करेगा ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो।






