
देहरादून: प्रदेश के किसानों को प्राकृतिक और मोटे अनाज की खेती से जोड़ने के लिए राज्य सरकार ने प्रयास तेज करने के संकेत दिए हैं। कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने कैंप कार्यालय में विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ जमीनी स्तर पर नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
राज्य में बदलते कृषि परिदृश्य और जलवायु चुनौतियों के बीच सरकार प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज को प्राथमिकता दे रही है। इसका उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पोषण सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती देना है। इसी क्रम में कृषि एवं उद्यान विभाग की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक और मोटे अनाज की खेती का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। साथ ही चौबटिया स्थित अनुसंधान केंद्र को पुनर्जीवित करने और प्रदेश में विलुप्त होती माल्टा की विभिन्न प्रजातियों को फिर से विकसित करने के प्रयासों में तेजी लाई जाए।
बैठक में उन्होंने किसानों के लिए टेस्टिंग लैब और इंटीग्रेटेड पैक हाउस के निर्माण को लेकर भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए, ताकि उत्पादों को बेहतर बाजार सुविधा और मूल्य संवर्धन का लाभ मिल सके।
स्थानीय प्रतिक्रिया
किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्राकृतिक खेती और मोटे अनाज के लिए बाजार, परीक्षण और पैकेजिंग की सुविधाएं मजबूत होती हैं, तो इससे किसानों की आय में स्थिरता आएगी और स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलेगी।
आगे क्या होगा
कृषि मंत्री ने महानिदेशक कृषि एवं उद्यान वंदना सिंह को निर्देश दिए कि केंद्रीय बजट के अनुरूप राज्य स्तर पर ठोस और व्यावहारिक प्रस्ताव तैयार किए जाएं। आने वाले समय में इन प्रस्तावों के आधार पर योजनाओं को लागू कर अधिक से अधिक किसानों को लाभ पहुंचाने की तैयारी की जाएगी।
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