
देहरादून में ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों ने एक बार फिर सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तराखंड विद्युत अधिकारी कर्मचारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अपनी 19 सूत्रीय मांगों को लेकर 7 अप्रैल से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। मोर्चे का कहना है कि यदि सरकार और निगम प्रबंधन ने समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया, तो प्रदेशभर में चरणबद्ध आंदोलन के बाद पूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा। ऐसे में चारधाम यात्रा और गर्मी के मौसम से पहले प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
उत्तराखंड में ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों की मांगें लंबे समय से लंबित बताई जा रही हैं। इससे पहले भी कर्मचारी ज्ञापन, धरना और वार्ताओं के माध्यम से सरकार का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं। हालांकि हर बार आश्वासन मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने का आरोप लगाया जाता रहा है। मौजूदा स्थिति में आंदोलन की घोषणा ने सरकार और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
हड़ताल और आंदोलन की रूपरेखा
संघर्ष मोर्चा ने आंदोलन की शुरुआत सांकेतिक प्रदर्शन से करने का निर्णय लिया है। इसके बाद आंदोलन को क्रमिक रूप से तेज किया जाएगा और अंततः 7 अप्रैल से पूर्ण हड़ताल की जाएगी। इस संबंध में प्रमुख सचिव ऊर्जा के साथ-साथ उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक को औपचारिक नोटिस भेज दिया गया है।
19 सूत्रीय मांगों में क्या प्रमुख
कर्मचारियों के अनुसार उनकी 19 सूत्रीय मांगों में समान काम के बदले समान वेतन के तहत उपनल कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों के बराबर वेतन देने, समय पर पदोन्नति, वेतन-भत्तों में सुधार, सेवा शर्तों को स्पष्ट करने और कर्मचारियों की सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दे शामिल हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि ये मांगें वर्षों से लंबित हैं और हर बार केवल आश्वासन देकर मामला टाल दिया जाता है।
भूमि हस्तांतरण आदेश बना विवाद की बड़ी वजह
आंदोलन की एक बड़ी वजह जल विद्युत परियोजनाओं से संबंधित भूमि और संरचनाओं को उत्तराखंड निवेश एवं संवर्धन बोर्ड को सौंपने से जुड़ा आदेश भी है। कर्मचारियों का कहना है कि यह जमीन ऊर्जा निगम की संपत्ति है और इसे किसी भी सूरत में निजी हाथों में नहीं जाने दिया जाएगा। उनका आरोप है कि ऐसे फैसलों से निगम को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ कर्मचारियों के भविष्य पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया
ऊर्जा निगम के कर्मचारी संगठन के प्रवक्ता विनोद कवि ने कहा कि निगम की जमीन और संसाधनों को खुर्द-बुर्द नहीं होने दिया जाएगा। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि यदि समय रहते सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता नहीं दिखाई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
आगे क्या होगा
सरकार के सामने इस समय दोहरी चुनौती है। एक ओर चारधाम यात्रा और गर्मी के मौसम में निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर ऊर्जा कर्मचारियों की बढ़ती नाराजगी को भी संभालना होगा। फिलहाल सरकार की ओर से मांगों पर कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया है। अधिकारी टिप्पणी करने से बचते दिखे।







