
देहरादून: उत्तराखंड में उपनल कर्मचारियों का आक्रोश एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। हालिया कैबिनेट बैठक में उपनल कर्मियों को लेकर कोई ठोस निर्णय न होने से कर्मचारियों में भारी निराशा है। लंबे समय से सरकार से सकारात्मक फैसले की उम्मीद लगाए बैठे उपनल कर्मचारी अब अपने भविष्य को लेकर गंभीर चिंता में हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार आश्वासन मिलने के बावजूद जब कैबिनेट स्तर पर उनके मुद्दे को टाल दिया जाता है, तो इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। इसी के चलते कर्मचारियों ने सरकार को जल्द निर्णय लेने की चेतावनी दी है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उपनल कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे पिछले काफी समय से चर्चा में हैं। पिछली कैबिनेट बैठकों में भी इस विषय पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सका था। इस बार कर्मचारियों को उम्मीद थी कि उनके पक्ष में कोई ठोस प्रस्ताव लाया जाएगा, लेकिन जब कैबिनेट में आए मामलों की सूची में उपनल कर्मचारियों से संबंधित कोई प्रस्ताव शामिल नहीं दिखा, तो कर्मचारियों का धैर्य जवाब दे गया। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब न्यायालय के निर्देशों के बाद भी स्पष्ट नीति की प्रतीक्षा बनी हुई है।
आधिकारिक जानकारी
सरकार की ओर से उपनल कर्मचारियों के मामले में कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल की अध्यक्षता में एक उपसमिति का गठन किया गया है, जो कर्मचारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रही है। हालांकि, इस उपसमिति में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को शामिल नहीं किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। सरकार की ओर से समान कार्य के बदले समान वेतन पर विचार की बात कही गई है, लेकिन इसे लेकर अब तक कोई स्पष्ट निर्णय सामने नहीं आया है। अधिकारी इस विषय में ठोस टिप्पणी करने से बचते दिखे।
स्थानीय / मानवीय आवाजें
उपनल कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से नियमितीकरण और वेतन संबंधी स्पष्ट नीति का इंतजार कर रहे हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि अनिश्चितता के कारण उनके परिवारों पर भी इसका सीधा असर पड़ रहा है और भविष्य को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है।
कर्मचारियों के आरोप
उपनल महासंघ के अध्यक्ष विनोद गोदियाल ने कहा कि खुद सैनिक कल्याण मंत्री और कैबिनेट मंत्री कर्मचारियों के पक्ष में निर्णय लेने की बात कह चुके हैं, इसके बावजूद कैबिनेट में बार-बार उनका मामला न लाया जाना सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले एक से दो सप्ताह के भीतर उपनल कर्मचारियों के हित में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो कर्मचारी फिर से आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।
आंकड़े / तथ्य
उपनल कर्मचारी पिछले कुछ वर्षों से नियमितीकरण और समान वेतन की मांग कर रहे हैं।
हाल ही में कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल और आंदोलन भी किया था।
नैनीताल हाईकोर्ट उपनल कर्मचारियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित करने के निर्देश दे चुका है।
आगे क्या होगा
यदि सरकार की ओर से शीघ्र कोई निर्णय नहीं लिया गया, तो उपनल कर्मचारी आंदोलन तेज कर सकते हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा सरकार के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तर पर बड़ी चुनौती बन सकता है।





