
देहरादून: साइबर हमलों और डिजिटल खतरों से बचाव के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड ने सुरक्षा परिचालन केंद्र (एसओसी) का गठन किया है। यह केंद्र चौबीसों घंटे आईटी अवसंरचना, नेटवर्क, सर्वर और डिजिटल प्रणालियों की निगरानी करेगा। एसओसी के माध्यम से साइबर खतरों की पहचान, उनका विश्लेषण और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे बिजली आपूर्ति से जुड़ी डिजिटल प्रणालियों को सुरक्षित रखा जा सके।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
बढ़ते डिजिटलीकरण के साथ बिजली विभाग की आईटी प्रणालियां भी साइबर खतरों के दायरे में आ रही हैं। हाल के वर्षों में सरकारी और सार्वजनिक उपक्रमों पर साइबर हमलों की घटनाएं सामने आई हैं, जिसके चलते डिजिटल सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाई जा रही है।
आधिकारिक जानकारी
यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार ने बताया कि एसओसी का मुख्य उद्देश्य साइबर खतरों से बचाव करते हुए आईटी अवसंरचना और डिजिटल सिस्टम की सतत निगरानी करना है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र साइबर हमलों, डेटा उल्लंघन, मैलवेयर, रैनसमवेयर और अन्य सुरक्षा घटनाओं की समय रहते पहचान कर उन्हें नियंत्रित करने में सक्षम होगा।
प्रशिक्षित टीम और जिम्मेदारियां
एसओसी में प्रशिक्षित साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है, जो आधुनिक सुरक्षा उपकरणों और तकनीकों के जरिए सुरक्षा घटनाओं की निगरानी और समाधान करेगी। यूपीसीएल की ओर से अधीक्षण अभियंता विकास गुप्ता को मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (सीआईएसओ) और अधिशासी अभियंता मोहन मित्तल को सहायक सीआईएसओ नामित किया गया है।
केंद्र सरकार के निर्देशों का अनुपालन
केंद्र सरकार की एजेंसियों द्वारा जारी साइबर सुरक्षा दिशानिर्देशों के तहत सभी सरकारी कर्मचारियों—आउटसोर्स, संविदा और अस्थायी कर्मियों सहित—के लिए सूचना सुरक्षा से जुड़े विस्तृत मानक निर्धारित किए गए हैं। यूपीसीएल ने इन निर्देशों को संकलित कर निगम के विभिन्न कार्यालयों और इकाइयों तक प्रसारित किया है, ताकि उनका प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके।
आगे क्या होगा
एसओसी के सक्रिय होने से यूपीसीएल की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत होने की उम्मीद है। आने वाले समय में साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, सिस्टम ऑडिट और तकनीकी उन्नयन के जरिए इस व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा।




