
लक्सर: खानपुर विधायक उमेश कुमार ने हरिद्वार को उत्तराखंड की अस्थायी राजधानी बनाए जाने की मांग उठाई है। लक्सर शुगर मिल के पेराई सत्र के शुभारंभ अवसर पर उन्होंने कहा कि “हरिद्वार को पराया करने की कोशिश की जा रही है, जबकि यहां इतनी भूमि है कि पूरा प्रशासनिक ढांचा स्थापित किया जा सकता है।” साथ ही उन्होंने सरकार से गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
उत्तराखंड राज्य गठन को 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित विशेष सत्र में राजधानी को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर सामने आ गया है। राज्य गठन के समय देहरादून को अस्थायी राजधानी बनाया गया था और गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने की चर्चा लगातार जारी रही है। इसी संदर्भ में अब खानपुर विधायक उमेश कुमार का बयान इस मुद्दे को फिर राजनीतिक केंद्र में ले आया है।
उमेश कुमार का बयान
विधायक उमेश कुमार ने कहा — “हमें हरिद्वार में अस्थायी राजधानी चाहिए। हरिद्वार को पराया किया जा रहा है, जबकि यहां इतनी जमीन है कि हम 50 एयरपोर्ट, 50 मेडिकल कॉलेज और 50 सचिवालय बना सकते हैं। गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने का निर्णय सरकार का हो सकता है, लेकिन फिलहाल हरिद्वार को अस्थायी राजधानी बनाया जाना चाहिए।”
उन्होंने यह भी कहा कि जब विधानसभा सत्र के दौरान पहाड़ को लेकर बयान दिया गया था, तब उन्होंने गैरसैंण के समर्थन में बात की थी। “मैंने गैरसैंण के लिए आंदोलन की बात की थी, लेकिन आज हमें ही अलग करने की कोशिश हो रही है।”
सदन में बढ़ी गरमाहट
राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर बुलाए गए तीन दिवसीय विशेष सत्र के दौरान कई विधायक राजधानी के मुद्दे पर आमने-सामने दिखे।
सत्र में विधायक मोहम्मद शहजाद ने भी डेमोग्राफी चेंज, पलायन और मूल निवास जैसे मुद्दों को उठाया। उन्होंने कहा कि हमें पूरे राज्य के विकास पर चर्चा करनी चाहिए — “पलायन कैसे रुके, पहाड़ में रोजगार और उद्योग कैसे लगें, इस पर ठोस नीति बने।”
गैरसैंण पर बहस और टकराव
सदन के दौरान भाजपा विधायक विनोद चमोली ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने की उपलब्धि को भाजपा सरकार की पहल बताया और कहा कि इसे स्थायी राजधानी बनाने के लिए उच्च स्तरीय अधिकारी बैठाना चाहिए।
इस दौरान उमेश कुमार ने बीच में कहा कि “गैरसैंण पर अपना स्टैंड स्पष्ट करें।” इस पर चमोली ने पलटवार करते हुए कहा — “उत्तराखंड के चौधरी मत बनिए, हमें मत बताइए कि पहाड़ के लिए क्या करना है।”
दोनों विधायकों के बीच इस बयानबाज़ी से सदन में कुछ समय के लिए माहौल गर्म हो गया।
राजनीतिक हलचल और प्रतिक्रिया
उमेश कुमार के बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में राजधानी को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कुछ जनप्रतिनिधि इसे मैदान और पहाड़ की राजनीति से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ इसे क्षेत्रीय संतुलन के दृष्टिकोण से जरूरी बता रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हरिद्वार राज्य का प्रवेश द्वार है और यहां प्रशासनिक राजधानी की स्थापना से विकास और समन्वय दोनों को बढ़ावा मिल सकता है।
आगे क्या होगा
राजधानी का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्य सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है। विशेष सत्र में उठे इन बयानों के बाद संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस विषय पर विस्तृत समीक्षा और चर्चा के लिए एक उच्च स्तरीय समिति बना सकती है।







