
देहरादून में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा पेपर लीक मामले में जांच कर रही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने तीन आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी है। चार्जशीट में असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को मुख्य आरोपी बनाया गया है, जबकि उस समय के अभ्यर्थी खालिद और उसकी बहन साबिया को भी आरोपी बनाया गया है। यह मामला राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य से जुड़ा होने के कारण बेहद अहम माना जा रहा है।
पृष्ठभूमि / संदर्भ
यह प्रकरण 21 सितंबर को आयोजित उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की स्नातक स्तरीय परीक्षा से जुड़ा है। परीक्षा के दौरान पेपर के तीन पन्नों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिसके बाद बेरोजगार संघ ने इसे पेपर लीक करार दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए रायपुर थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और प्रारंभिक जांच शुरू हुई।
आधिकारिक जानकारी
जांच में सामने आया कि पेपर हरिद्वार के बहादरपुर जट स्थित परीक्षा केंद्र से बाहर भेजा गया था। पुलिस के अनुसार, अभ्यर्थी खालिद ने परीक्षा केंद्र में पहले से छिपाए मोबाइल फोन के जरिए पेपर की तस्वीरें अपनी बहन साबिया को भेजीं। साबिया ने ये तस्वीरें उस समय टिहरी गढ़वाल के शहीद श्रीमती हंसा धनाई राजकीय महाविद्यालय में तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर सुमन चौहान को अग्रेषित की थीं।
सरकारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 26 अक्टूबर को सीबीआई ने मामला दर्ज किया। प्राथमिक जांच के बाद सीबीआई ने 28 नवंबर को सुमन चौहान को षड्यंत्र में शामिल पाते हुए गिरफ्तार किया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया।
स्थानीय प्रतिक्रिया
बेरोजगार युवाओं का कहना है कि यह कार्रवाई परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में जरूरी कदम है। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने पहले ही स्पष्ट किया था कि निष्पक्ष जांच से ही प्रतियोगी परीक्षाओं पर विश्वास लौट सकता है।
आंकड़े / तथ्य
इस मामले को लेकर देहरादून में बेरोजगार युवाओं ने आठ दिनों तक सीबीआई जांच की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धरना स्थल पर पहुंचकर सीबीआई जांच की संस्तुति का भरोसा दिया, जिसके बाद आंदोलन स्थगित हुआ।
आगे क्या होगा
सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद अब अदालत में नियमित सुनवाई शुरू होगी। अभियोजन पक्ष की दलीलों और सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय की जाएगी, जिससे यह स्पष्ट होगा कि आरोपियों पर किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है।






